भारतीय सिनेमा जगत में पौराणिक और धार्मिक कथाओं पर आधारित फिल्मों का दौर एक बार फिर अपने चरम पर है और इसी कड़ी में हनुमान अंश ने सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। फिल्म ने अपनी रिलीज के बाद से ही बॉक्स ऑफिस पर टिकट खिड़की पर शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों की भारी भीड़ को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह कामयाब रही। इस शानदार प्रदर्शन के बल पर इस फिल्म ने पूर्व में रिलीज हुई चर्चित फिल्म महावतार नरसिम्हा के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। समीक्षकों का मानना है कि इस फिल्म की कहानी, इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई आधुनिक तकनीक और सनातन संस्कृति से जुड़े प्रसंगों को जिस प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा गया है, उसने इसे आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। फिल्म से जुड़े निर्माताओं और कलाकारों के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि किसी भी धार्मिक शैली की फिल्म के लिए इतनी बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल करना अपने आप में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान है।
इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे भारतीय सिनेमा में पौराणिक कथाओं के प्रति बढ़ते रुझान और दर्शकों की बदलती रुचि को मुख्य कारण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड और अन्य क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों ने भारतीय इतिहास और धार्मिक ग्रंथों से प्रेरणा लेकर कई बड़ी फिल्में बनाई हैं, जिन्हें दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया है। महावतार नरसिम्हा जैसी फिल्मों ने पहले ही यह साबित कर दिया था कि अगर पौराणिक कथाओं को सही विजुअल इफेक्ट्स और मजबूत पटकथा के साथ पेश किया जाए, तो दर्शक सिनेमाघरों की तरफ जरूर खिंचे चले आएंगे। हनुमान अंश ने उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए न केवल कहानी कहने के अपने अंदाज से बल्कि बेहतरीन मार्केटिंग और वितरण रणनीतियों के जरिए भी सफलता के नए द्वार खोले हैं। फिल्म के निर्देशक और मुख्य कलाकारों ने इसके प्रचार-प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसका सीधा असर इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर देखने को मिला। पारिवारिक दर्शकों ने इस फिल्म को अपनी पहली पसंद बनाया और सामूहिक रूप से सिनेमाघरों का रुख किया, जिससे इसकी कमाई के आंकड़े लगातार ऊंचे होते चले गए।
इस रिकॉर्ड-तोड़ सफलता का असर आने वाले समय में बॉलीवुड के फिल्म निर्माताओं की रणनीतियों पर भी साफ तौर पर दिखाई देगा। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हनुमान अंश की इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद अब और भी बड़े बैनर पौराणिक और धार्मिक विषयों पर भारी-भरकम बजट वाली फिल्में बनाने के लिए प्रेरित होंगे। उद्योग जगत के जानकारों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में कई नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा की जा सकती है जो इसी शैली पर आधारित होंगे। इसके साथ ही, वीएफएक्स और एनिमेशन के क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय तकनीशियनों के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है क्योंकि ऐसी फिल्मों की सफलता उच्च कोटि के ग्राफिक्स और दृश्य प्रभावों पर बहुत हद तक निर्भर करती है। कुल मिलाकर, हनुमान अंश ने केवल एक वित्तीय रिकॉर्ड ही नहीं तोड़ा है, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग को एक नई दिशा और एक नया दर्शक वर्ग भी प्रदान किया है, जो आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस के समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख देगा।