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बदलता दौर: भारतीय सिनेमा में फूलों से लेकर टॉक्सिक के इंटीमेट सीन्स तक रोमांस का सफर
भारतीय फिल्म उद्योग में पिछले कुछ दशकों के दौरान ऑन-स्क्रीन रोमांस के चित्रण में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां पारंपरिक दृश्यों की जगह आधुनिक और बोल्ड कहानियों ने ले ली है।
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Ankit Yadav
24 अग 2026, 12:11
भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर से लेकर आज के आधुनिक युग तक, फिल्मों में प्यार और रोमांस को दिखाने के तरीके में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। पुरानी हिंदी फिल्मों में नायक और नायिका के बीच भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सीधे तौर पर अंतरंग दृश्यों का सहारा नहीं लिया जाता था। इसके बजाय, निर्देशक रूपकों और प्रतीकों का उपयोग करते थे, जो दर्शकों के दिलों को छू लेते थे। उस समय के दौर में दो फूलों का आपस में टकराना या फिर तेज बारिश के बीच गानों के जरिए प्रेम की गहराइयों को दर्शाना ही काफी माना जाता था। इन कलात्मक तरीकों ने भारतीय दर्शकों की कल्पनाशीलता को एक अलग ही ऊंचाई दी थी और इसे बेहद शालीनता के साथ पर्दे पर उतारा जाता था। समय बीतने के साथ-साथ समाज की सोच और सिनेमाई तकनीक दोनों में तेजी से बदलाव आया, जिसका सीधा असर फिल्मों की पटकथा और निर्देशन पर भी साफ-साफ दिखाई देने लगा।
समय के साथ बदलती पटकथा और बोल्ड कहानियां
नब्बे के दशक और उसके बाद की फिल्मों में निर्देशकों ने अपनी कहानियों को अधिक यथार्थवादी बनाने का प्रयास किया। पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव और बदलते सामाजिक परिवेश के कारण फिल्मों में नायक-नायिका के बीच की दूरियां कम होने लगीं। फिल्मों में लिपलॉक और थोड़े बहुत अंतरंग दृश्यों का आना आम बात बन गई, जिससे युवा पीढ़ी तेजी से जुड़ी। हालांकि, उस समय भी अधिकांश मुख्यधारा की फिल्मों में इस तरह के सीन्स को एक सीमा के भीतर ही रखा जाता था ताकि पारिवारिक दर्शक असहज महसूस न करें। लेकिन आज के दौर में सिनेमा का दायरा बहुत अधिक विस्तृत हो चुका है और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद कहानी कहने की शैली पूरी तरह से बदल गई है। दर्शक अब पारंपरिक और दबी-छिपी कहानियों की बजाय अधिक स्पष्ट और साहसिक विषयों को देखना पसंद कर रहे हैं, जो जीवन की सच्चाई के ज्यादा करीब होते हैं।
टॉक्सिक जैसी फिल्मों और आधुनिक दौर का प्रभाव
हाल के वर्षों में रिलीज होने वाली फिल्मों और आने वाली बड़ी प्रोजेक्ट्स जैसे 'टॉक्सिक' जैसी फिल्मों में इंटीमेट सीन्स और रोमांस के नए आयाम देखने को मिल रहे हैं। आधुनिक सिनेमा में अब भावनाओं को छिपाने के बजाय उन्हें बेहद खुलकर और बिना किसी संकोच के परदे पर उकेरा जा रहा है। आज के फिल्ममेकर्स कहानी की मांग के अनुसार किरदारों के बीच के रिश्तों की जटिलताओं और उनकी शारीरिक नजदीकियों को बिल्कुल वैसे ही दिखाते हैं जैसा कि आज की युवा पीढ़ी अनुभव करती है। इस बदलाव ने आलोचकों और दर्शकों के बीच एक लंबी बहस भी छेड़ दी है, जहां कुछ लोग इसे कला की स्वतंत्रता और आधुनिकता का प्रतीक मानते हैं, वहीं कुछ पुराने दर्शक इसे भारतीय संस्कृति के दायरे से बाहर मानते हैं। इसके बावजूद, यह एक अकाट्य सत्य है कि बॉक्स ऑफिस की डिमांड और दर्शकों की बदलती रुचि के कारण आज का बॉलीवुड रोमांस के मोर्चे पर पूरी तरह से आधुनिक और बोल्ड हो चुका है, और आने वाले समय में यह ट्रेंड और अधिक विकसित होने की पूरी उम्मीद है।