बचपन का कड़ा संघर्ष और रेलवे ट्रेनों में सामान बेचना
भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेमिसाल कॉमेडी के बल पर दर्शकों को लोटपोट कर देने वाले मशहूर हास्य कलाकार महमूद की आज 94वीं जयंती मनाई जा रही है। उनका जन्म 29 सितंबर 1932 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली चालीस के दशक से लेकर सत्तर के दशक तक हिंदी फिल्मों में अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए एक जाने-माने डांसर और अभिनेता रह चुके थे। घर में फिल्मी माहौल होने के बावजूद उन्हें अपने शुरुआती जीवन में भीषण आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा था। परिवार का भरण-पोषण करने और घर का खर्च चलाने के लिए उन्हें बहुत कम उम्र में ही काम करना शुरू करना पड़ गया था। अपनी रोजी-रोटी कमाने के खातिर उन्होंने मुंबई की स्थानीय ट्रेनों में घूम-घूमकर टॉफियां बेचने का काम किया था। इसके अलावा उन्होंने रेलवे स्टेशनों के बाहर खड़े होकर अंडे बेचने का छोटा-मोटा काम भी किया था। कम उम्र के इन कठिन दिनों में उन्होंने जीवन की वास्तविक सच्चाइयों का सामना किया और अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ने का रास्ता चुना। उनके पिता के फिल्मी करियर के बाद भी घर की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। ऐसे में इन छोटे-छोटे कामों ने उन्हें जीवन के शुरुआती दौर में ही आत्मनिर्भर बना दिया था।
बाल कलाकार के रूप में शुरुआत और अभिनय में सफर
महज ग्यारह वर्ष की छोटी सी उम्र में ही उन्हें फिल्मों में काम करने का अवसर मिल गया था और उन्होंने सिनेमा की दुनिया में कदम रख दिया था। वर्ष 1943 में प्रदर्शित हुई प्रसिद्ध फिल्म किस्मत के जरिए उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत की थी। अशोक कुमार के मुख्य अभिनय वाली इस मूवी के अंदर उन्होंने शेखर नाम के एक छोटे से बच्चे का किरदार निभाया था। आगे चलकर जब उन्होंने एक पूर्ण अभिनेता के रूप में अपनी मुख्य शुरुआत की तो उनके सामने देव आनंद और वहीदा रहमान जैसे बड़े सितारे थे। साल 1956 में सिनेमाघरों में आई फिल्म सीआईडी के माध्यम से उन्हें एक वयस्क अभिनेता के रूप में पहचान मिली थी। उस मूवी में उनके द्वारा निभाए गए किरदार का नाम शेर सिंह था जो काफी चर्चित रहा था। हालांकि उस फिल्म में उन्होंने कोई भी हास्य भूमिका नहीं निभाई थी बल्कि एक खलनायक यानी नेगेटिव रोल अदा किया था। इसके बाद उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में तीन सौ से भी ज्यादा फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा था। उनकी बेहतरीन फिल्मों की सूची में भूत बंगला, बॉम्बे टू गोवा, दो फूल, कुंवारा बाप, साधु और शैतान तथा एक कली मुस्काई जैसी तमाम शानदार फिल्में शामिल हैं। उन्होंने न केवल अभिनय के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ी बल्कि निर्देशन के मैदान में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।
दिग्गज कलाकारों के साथ किस्से और अंतिम विदाई
उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प किस्से आज भी फिल्मी गलियारों में बहुत चाव से याद किए जाते हैं। अपने शुरुआती दौर में काम पाने के लिए वे किशोर कुमार के सामने गिड़गिड़ाए भी थे लेकिन किशोर दा ने यह कहकर मना कर दिया था कि वे अपने लिए भविष्य में चुनौती पैदा नहीं करना चाहते। बाद में महमूद ने उनसे वादा किया था कि वे फिल्म निर्माता बनकर उन्हें अपनी फिल्म में जरूर लेंगे। उन्होंने अपना यह वादा पूरा करते हुए साल 1968 में अपनी होम प्रोडक्शन फिल्म पड़ोसन बनाई और उसमें किशोर कुमार को मुख्य रूप से कास्ट किया था। इसके अलावा उन्होंने राजेश खन्ना और हेमा मालिनी को लेकर जनता हवलदार नाम की एक फिल्म अपने फार्महाउस पर शूट की थी। उस फिल्म की शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की लगातार लेटलतीफी से तंग आकर उन्होंने एक बार गुस्से में आकर सुपरस्टार को थप्पड़ तक जड़ दिया था। अपने अभिनय से हर दर्शक को हंसाने वाले और किंग ऑफ कॉमेडी कहे जाने वाले इस महान कलाकार का जीवन संघर्षों से भरा रहा था। सबको अपनी कला से हंसा-हसाकर रुलाने वाले इस दिग्गज अभिनेता का 23 जुलाई 2004 को निधन हो गया था। उनकी आज 94वीं वर्षगांठ पर उनके योगदान को भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।