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जावेद अख्तर का जादू: 25 साल बाद भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है उनका लिखा जन्माष्टमी का यह खास गाना

बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर द्वारा रचे गए एक लोकप्रिय जन्माष्टमी गीत ने अपनी कलात्मक उत्कृष्टता के ढाई दशक पूरे कर लिए हैं। इस बेहतरीन रचना को तीन मुस्लिम हस्तियों ने मिलकर खास बनाया था, जिसकी गूंज आज भी उत्सव के खास मौकों पर सुनाई देती है।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 20:23
जावेद अख्तर का जादू: 25 साल बाद भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है उनका लिखा जन्माष्टमी का यह खास गाना
भारतीय सिनेमा जगत में कई ऐसे गीत रचे गए हैं जो किसी एक विशेष अवसर या पर्व की पहचान बन जाते हैं। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गीत प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर की कलम से निकला था, जिसने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के पर्व को और अधिक जीवंत बना दिया। यह गाना न केवल अपनी रिलीज के समय बेहद लोकप्रिय हुआ था, बल्कि आज भी जब यह स्वर लहरियों में गूंजता है, तो श्रोता बरबस ही झूम उठते हैं। संगीत प्रेमियों के दिलों पर इस रचना का जादू पिछले पच्चीस वर्षों से लगातार बरकरार है और इसकी मिठास समय के साथ कम होने के बजाय और अधिक गहरी होती गई है।

कला का कोई मजहब नहीं

इस खूबसूरत रचना की सबसे खास बात यह रही कि इसे आकार देने में तीन प्रमुख मुस्लिम कलाकारों का विशेष योगदान रहा, जो भारतीय कला और संस्कृति की गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। कला और संगीत की दुनिया सरहदों और धर्मों की सीमाओं से परे होती है, और इस गीत ने इस बात को एक बार फिर से साबित कर दिखाया। जावेद अख्तर के अर्थपूर्ण और भावपूर्ण शब्दों ने जब संगीत और स्वर की चादर ओढ़ी, तो एक ऐसा कालजयी गीत तैयार हुआ जो पीढ़ियों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। पच्चीस साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस गीत की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है, जो इसकी शाश्वत अपील को दर्शाता है। जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में बहुत ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसे पावन अवसर पर जब पारंपरिक भजनों के बीच इस तरह के आधुनिक और संस्कारी गीतों की गूंज सुनाई देती है, तो उत्सव का आनंद दोगुना हो जाता है। जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए इस गाने ने त्योहार के माहौल में एक अलग ही रंग भर दिया है। लोग आज भी इंटरनेट और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इस गाने को बड़े चाव से सुनते हैं और अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हैं। नई पीढ़ी के युवा भी इस धुन की ऊर्जा और शब्दों की गहराई से खासे प्रभावित नजर आते हैं। कलाकारों और संगीत प्रेमियों का मानना है कि इस तरह के गीत समाज को जोड़ने का काम करते हैं। जब इतने बड़े और प्रतिष्ठित नाम किसी पावन पर्व के लिए एकजुट होते हैं, तो एक ऐसा इतिहास बनता है जो सदियों तक याद रखा जाता है। आने वाले समय में भी इस गीत की प्रासंगिकता बनी रहने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि अच्छी कला कभी पुरानी नहीं होती। यह रचना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि सच्ची भावना से रचा गया साहित्य और संगीत हमेशा के लिए अमर हो जाता है।
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