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बॉलीवुड

जीवन बदलने वाला नाटक: राजनीति के चक्कर में जेल गए थे पंकज त्रिपाठी, फिल्म नहीं इस कला ने दी नई दिशा

बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी के जीवन से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प पहलू सामने आया है, जिसके बारे में जानकर उनके प्रशंसक हैरान रह जाएंगे। फिल्मों में आने से पहले उनकी जिंदगी को किसी और कला ने पूरी तरह बदल दिया था।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 11:29
जीवन बदलने वाला नाटक: राजनीति के चक्कर में जेल गए थे पंकज त्रिपाठी, फिल्म नहीं इस कला ने दी नई दिशा
बॉलीवुड के दिग्गज और अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी का सफर हमेशा से आसान नहीं रहा है। आज उन्हें सिल्वर स्क्रीन पर देखकर हर कोई उनके अभिनय कौशल की तारीफ करता है, लेकिन उनके जीवन की दिशा बदलने में फिल्मों का नहीं बल्कि एक खास नाटक का बहुत बड़ा हाथ रहा है। पंकज त्रिपाठी ने एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने पन्नों को साझा किया है, जिससे यह पता चलता है कि अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्हें किन-किन उतार-चढ़ाव और संघर्षों का सामना करना पड़ा था।

राजनीति से जुड़ा दिलचस्प और संघर्षपूर्ण दौर

अपने शुरुआती दिनों में पंकज त्रिपाठी का रुझान छात्र राजनीति की तरफ हुआ करता था। वह बिहार के अपने गृह क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहे थे। इसी राजनीतिक सक्रियता और आंदोलनों के चलते उन्हें एक समय पर जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। राजनीति की दुनिया में उनका यह दौर उनके जीवन का एक ऐसा मोड़ था, जहां उन्हें समाज को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। हालांकि, हालात कुछ ऐसे बने कि धीरे-धीरे उनका मोहभंग राजनीति से होने लगा और वह पूरी तरह से सांस्कृतिक व रचनात्मक गतिविधियों की तरफ आकर्षित होने लगे। उनके जीवन में एक नया मोड़ तब आया जब उन्होंने एक स्थानीय नाटक में हिस्सा लिया।

नाटक ने दी नई पहचान और कला के प्रति समर्पण

राजनीति के रास्ते से हटकर जब पंकज त्रिपाठी ने रंगमंच यानी थिएटर की दुनिया में कदम रखा, तो उनकी जिंदगी ने पूरी तरह से एक नया मोड़ ले लिया। उस नाटक में उनके अभिनय को लोगों ने बहुत सराहा और यहीं से उनके भीतर छिपे असली कलाकार को एक सही दिशा मिली। थिएटर के प्रति उनका यह प्यार उन्हें बाद में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानी एनएसडी तक ले गया। एनएसडी से कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया, जहां उन्हें शुरुआती दौर में लंबा संघर्ष करना पड़ा। कई छोटे-छोटे रोल करने के बाद 'गंगूज़ ऑफ़ वासेपुर' जैसी फिल्मों से उन्हें वह मुकाम मिला, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज पंकज त्रिपाठी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं, और उनके इस सफर में उस शुरुआती नाटक का योगदान सबसे अहम माना जाता है, जिसने उनकी तकदीर की इबारत लिखी थी।
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