पुलिस सेवा से सिनेमा तक का सफर
अभिनेता राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को लोरलाई में हुआ था, जो वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा है। उनका असली नाम कुलभूषण पंडित था। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले, वे मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में बतौर सब-इंस्पेक्टर कार्यरत थे। 40 के दशक में उनकी भेंट फिल्म निर्माता सोहराब मोदी से हुई, जिन्होंने उन्हें अपनी एक फिल्म में काम करने का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में हिचकिचाने के बाद, उन्होंने अभिनय में करियर बनाने का निर्णय लिया और पुलिस की नौकरी छोड़ दी। राजकुमार ने 26 वर्ष की आयु में फिल्म 'रंगीली' से बॉलीवुड में शुरुआत की। अपने चार दशक से अधिक के करियर में उन्होंने 70 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने 'मदर इंडिया', 'तिरंगा', 'सौदागर', 'हमराज' और 'हीर रांझा' जैसी यादगार फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। 3 जुलाई 1996 को 69 वर्ष की आयु में इस महान कलाकार का निधन हो गया था।
सहकर्मियों के साथ राजकुमार के किस्से
राजकुमार अपने बेबाक और मुंहफट स्वभाव के लिए फिल्म उद्योग में काफी मशहूर थे, जिससे अक्सर अन्य कलाकार उनसे दूरी बनाए रखते थे। 1989 की फिल्म 'जंगबाज' की शूटिंग के दौरान, राजकुमार ने गोविंदा की शर्ट की तारीफ की थी। गोविंदा ने उत्साह में वह शर्ट उन्हें भेंट कर दी, लेकिन दो दिन बाद राजकुमार ने उस शर्ट का रुमाल बनवाकर अपनी जेब में रखा था। एक पार्टी के दौरान राजकुमार ने अमिताभ बच्चन के सूट की तारीफ करते हुए तंज कसा कि उन्हें भी ऐसे पर्दे सिलवाने थे। वहीं, सलमान खान की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'मैंने प्यार किया' की सफलता पार्टी में राजकुमार ने सलमान को फटकार लगाई थी। जब सलमान ने उन्हें पहचाने बिना पूछा कि आप कौन हैं, तो राजकुमार ने जवाब दिया कि अपने पिता से पूछ लो कि हम कौन हैं। उनके ऐसे ही व्यवहार के कारण कई कलाकार उनके साथ काम करने से परहेज करते थे।
तिरंगा फिल्म और करियर की उपलब्धियां
राजकुमार की बेहतरीन फिल्मों में शुमार 'तिरंगा' फिल्म 1993 में रिलीज हुई थी। निर्देशक मेहुल कुमार ने एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि इस फिल्म में राजकुमार के साथ काम करने के लिए नाना पाटेकर से पहले रजनीकांत और नसीरुद्दीन शाह को भूमिका की पेशकश की गई थी। हालांकि, राजकुमार के साथ काम करने के नाम से ही उन दिग्गज अभिनेताओं ने फिल्म करने से स्पष्ट मना कर दिया था। राजकुमार का अभिनय कौशल कितना प्रभावी था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 'दिल एक मंदिर' और 'वक़्त' फिल्मों के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार मिला था। वे अपनी दमदार आवाज और बेहतरीन संवाद अदायगी के लिए दर्शकों के बीच हमेशा याद किए जाते हैं। आज उनकी 100वीं जयंती के अवसर पर उनके फिल्मी सफर और उनके बेबाक व्यक्तित्व के तमाम किस्से फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।