जागरण फिल्म फेस्टिवल में छलका अभिनेता का अनुभव गोरखपुर में आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान जाने-माने अभिनेता रवि किशन ने अपने फिल्मी जीवन के शुरुआती दौर के कड़े संघर्षों के बारे में खुलकर बातचीत की। इस मंच पर उन्होंने अपने जीवन के उन तमाम उतार-चढ़ाव को याद किया जब उन्हें अपनी कला को साबित करने के लिए भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि व्यक्ति के जीवन में समय सबसे बड़ा बलवान कारक होता है और सही वक्त आने पर हर मेहनत का फल जरूर मिलता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अपने तीन दशक से अधिक लंबे सफर के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने कभी भी हार न मानने की जिद के साथ अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए रखे। उनका यह संस्मरण वहां मौजूद सभी कलाप्रेमियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत साबित हुआ जिन्होंने उनके इस लंबे सफर के हर एक पड़ाव को बहुत ही गौर से सुना और सराहा।
तीन दशक से अधिक का कड़ा फिल्मी संघर्ष मनोरंजन जगत में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाने की यह यात्रा किसी भी कलाकार के लिए कभी भी आसान नहीं होती है और रवि किशन का यह सफर भी इसका एक जीवंत उदाहरण रहा है। भारतीय सिनेमा और विशेष रूप से क्षेत्रीय तथा मुख्यधारा के सिनेमा में अपने पैर जमाने के लिए उन्होंने करीब चौंतीस वर्षों तक निरंतर प्रयास और प्रतीक्षा की। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने कई प्रकार की भूमिकाओं को निभाया और हर बार अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों के दिलों में अपनी एक गहरी छाप छोड़ी। किसी भी अभिनेता के लिए इतने लंबे समय तक इंडस्ट्री में टिके रहना और हर बदलते दौर के साथ खुद को प्रासंगिक बनाए रखना बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। उनके इस सफर में उनका अटूट विश्वास और लगातार किया गया परिश्रम ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना जिसके बल पर उन्होंने तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों का डटकर सामना किया और अंततः उस मुकाम को हासिल किया जिसकी उन्होंने हमेशा से कल्पना की थी।
युवाओं के लिए प्रेरणा और भविष्य का संदेश उनके इस विशेष संबोधन से न केवल उनके पुराने संघर्षों की दास्तां सामने आई बल्कि आज के उन तमाम युवाओं को भी एक मजबूत संदेश मिला जो कला और अभिनय के क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों का मुख्य उद्देश्य ही यही होता है कि स्थापित कलाकार अपने अनुभवों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शन करें और उन्हें यह समझाएं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। जब एक अनुभवी अभिनेता अपने जीवन के कठिन पन्नों को सबके सामने खोलता है तो उससे समाज और नई पीढ़ी को धैर्य और निरंतरता का पाठ मिलता है। गोरखपुर की इस धरती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने अपने उन शुरुआती दिनों को याद किया तो उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। आने वाले समय में उनके इस प्रेरणादायक संबोधन को क्षेत्र के उभरते कलाकारों द्वारा एक मार्गदर्शिका के रूप में याद रखा जाएगा जो उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा।