कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
फिर चालबाजी कर रहा चीन, अरुणाचल सीमा पर बढ़ा तनाव, कई जगहों पर आमने-सामने के हालात      'आजम थे, हैं और रहेंगे, फर्जी मुकदमे लंबे समय तक उन्हें कैद नहीं रख सकते', जेल में मुलाकात के बाद बोले अखिलेश      Investigation : BIPARD में गेस्ट फैकल्टी बन अधिकारियों ने 3 साल में कमाये 8 करोड़, पैनल में नाम नहीं फिर भी हुआ पेमेंट      तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी      EC के अफसर पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप: RTI से खुलासा- दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकाय...      MLC वोटिंग से पहले आधी रात को 7 गाड़ियों में पहुंची पुलिस, पटना में RJD प्रत्याशी डॉ संजीव के घर क्या हुआ?      'मेरी नीतियों के केंद्र में देश के युवा', बोले PM मोदी      आखिर दिक्कत क्या है; मार्को रुबियो से मुंबई में मुलाकात पर खुलकर बोले एस जयशंकर, दिया इंदिरा गांधी का उदाहरण     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
बॉलीवुड

सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास: भारतीय पर्दे पर कदम रखने वाली पहली अभिनेत्री दुर्गाबाई की अनकही दास्तान

भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर में अपने अभिनय से अमिट छाप छोड़ने वाली और पर्दे पर उतरने वाली पहली अभिनेत्री दुर्गाबाई की प्रेरणादायक यात्रा।

X
Kantap News डेस्क
15 अग 2026, 15:10
सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास: भारतीय पर्दे पर कदम रखने वाली पहली अभिनेत्री दुर्गाबाई की अनकही दास्तान
भारतीय सिनेमा का सफर बेहद संघर्ष और नए आयामों को छूने वाला रहा है। इस ऐतिहासिक सफर में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और कला के दम पर अभिनय जगत की नींव मजबूत की। शुरुआती दौर में जब महिलाओं का फिल्मों में आना वर्जित माना जाता था, तब कुछ ऐसी साहसी शख्सियतों ने कदम रखा जिन्होंने इतिहास रच दिया। उन्हीं में से एक प्रमुख नाम दुर्गाबाई का है, जिन्हें भारतीय सिनेमा के पर्दे पर आने वाली पहली अभिनेत्री के रूप में याद किया जाता है।

दुर्गाबाई की अनूठी सिनेमाई यात्रा

उन शुरुआती दिनों में जब सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी पहचान बनाना बेहद कठिन था, तब दुर्गाबाई ने एक नया रास्ता दिखाया। उनकी यह कहानी केवल अभिनय की दुनिया में प्रवेश करने की नहीं, बल्कि कला के प्रति उनके समर्पण और स्वतंत्रता की भावना को भी दर्शाती है। फिल्म जगत के शुरुआती इतिहास को खंगालने पर यह स्पष्ट होता है कि उनके योगदान के बिना भारतीय सिनेमा का आरंभिक अध्याय अधूरा माना जाता है। आज जब दर्शक और इतिहासकार भारतीय फिल्मों के सौ से अधिक वर्षों के सफर को याद करते हैं, तो उन पथप्रदर्शकों का जिक्र जरूर होता है जिन्होंने इस संस्कृति को गढ़ा। दुर्गाबाई की यह कहानी नई पीढ़ी के कलाकारों और सिने प्रेमियों को यह सिखाती है कि मनोरंजन जगत के आज के इस भव्य स्वरूप के पीछे कितने कड़े संघर्ष छिपे हुए हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज