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आर्थिक इतिहास का नया विश्लेषण: शोध रिपोर्ट के अनुसार औपनिवेशिक शासनकाल में ब्रिटेन ने भारत की कुल जीडीपी का सत्ताईस प्रतिशत हिस्सा चूसा

एक नए व्यापक ऐतिहासिक शोध में औपनिवेशिक काल के दौरान भारत से हुए धन के निष्कासन और उसके विनाशकारी प्रभावों का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

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Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 12:59
आर्थिक इतिहास का नया विश्लेषण: शोध रिपोर्ट के अनुसार औपनिवेशिक शासनकाल में ब्रिटेन ने भारत की कुल जीडीपी का सत्ताईस प्रतिशत हिस्सा चूसा
इतिहास के पन्नों को खंगालती एक ताजा रिपोर्ट ने औपनिवेशिक शासन के दौरान हुए आर्थिक शोषण के पैमाने को पूरी दुनिया के सामने ला दिया है। अध्ययन के अनुसार, ब्रिटिश राज के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को किस सुनियोजित तरीके से कमजोर किया गया और यहाँ की संपदा को बाहर ले जाया गया, इसका सटीक आंकड़ा अब सामने आया है। शोधकर्ताओं ने आधुनिक आर्थिक मापदंडों का उपयोग करते हुए यह गणना की है कि किस प्रकार एक समृद्ध राष्ट्र को जानबूझकर गरीब बनाया गया, जिससे स्थानीय उद्योगों और कृषि व्यवस्था को अपूरणीय क्षति हुई।

व्यवस्थित धन निकासी

रिपोर्ट में इस बात पर विशेष प्रकाश डाला गया है कि व्यापार संतुलन और कर प्रणाली का दुरुपयोग करके भारी मात्रा में धन को ब्रिटेन स्थानांतरित किया गया था। इस प्रक्रिया के कारण देश की आंतरिक पूंजी निर्माण क्षमता पूरी तरह से नष्ट हो गई, जिसका असर सदियों तक यहाँ के सामाजिक ताने-बाने पर दिखाई दिया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह विश्लेषण न केवल अतीत की सच्चाई को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि यह संसाधन देश के भीतर रहते तो आज तस्वीर कुछ और ही होती।

ऐतिहासिक सुधार और सबक

इस प्रकार के शोध कार्य भविष्य के नीति निर्माताओं और इतिहासकारों को औपनिवेशिक नीतियों के दीर्घकालिक परिणामों को समझने में मदद करते हैं। शैक्षणिक हलकों में इस रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा हो रही है और इसे दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग उठ रही है। इतिहास के इस काले अध्याय का निष्पक्ष आकलन करना राष्ट्र निर्माण और आत्ममंथन के लिए बेहद आवश्यक माना जा रहा है।
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