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अमेरिकी शुल्क नीति पर सलाह: अमेरिकी राष्ट्रपति के बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच बातचीत लंबी खींचने की हिदायत

रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी शुल्कों की धमकियों के बीच एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने भारत सरकार को कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से बातचीत को लंबा खींचने की सलाह दी है।

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Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 17:28
अमेरिकी शुल्क नीति पर सलाह: अमेरिकी राष्ट्रपति के बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच बातचीत लंबी खींचने की हिदायत
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों और रूस से कच्चे तेल के आयात पर संभावित अमेरिकी शुल्कों को लेकर चर्चाओं का दौर गर्म है। इस बीच, प्रख्यात अर्थशास्त्री और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व सलाहकार संतोष मल्होत्रा ने एक अहम बयान में कहा है कि भारतीय कूटनीतिक अधिकारियों को वर्तमान व्यापार वार्ताओं को यथासंभव लंबे समय तक खींचना चाहिए। उनका तर्क है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय अपने घरेलू मोर्चे पर कम लोकप्रियता रेटिंग और आगामी चुनावों के भारी राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए यह समय अनुकूल है कि वह कूटनीतिक धैर्य का परिचय देते हुए जल्दबाजी में कोई कड़ा फैसला लेने से बचे और स्थिति का बारीकी से आकलन करे।

वैश्विक बाजार और घरेलू रणनीतियां

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और देश को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत ही निर्णय लेने चाहिए। अमेरिकी प्रशासन की ओर से मिलने वाली चेतावनियों के बावजूद भारतीय नीति निर्माताओं ने हमेशा राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। यदि भारत व्यापारिक वार्ताओं की प्रक्रिया को चतुराई से आगे बढ़ाता है, तो अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में आने वाले बदलावों का लाभ उठाया जा सकता है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति पर घरेलू मतदाताओं को महंगाई और आर्थिक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने का दबाव है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं के रुख को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

दीर्घकालिक कूटनीतिक लाभ

विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि भारत को केवल अमेरिकी दबाव में झुकने के बजाय अपने अन्य रणनीतिक साझेदारों के साथ भी संबंधों को मजबूत करना चाहिए। ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना और घरेलू अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला बनाना ही भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने का सबसे बेहतरीन उपाय है। सरकार के उच्च स्तर पर इन आर्थिक सलाहों पर गंभीरता से विचार किए जाने की संभावना है ताकि देश के विकास रथ को किसी भी बाहरी भू-राजनीतिक झटके से सुरक्षित रखा जा सके।
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