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वैश्विक सुस्ती के बीच भारत के निर्यात को नई दिशा: नए बाजारों ने संभाली कमान

भारत के विभिन्न निर्यात क्षेत्रों में नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के खुलने से व्यापार विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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Ankit Yadav
20 अग 2026, 16:29
भारत के निर्यात में नए बाजारों की भूमिका बढ़ी

वैश्विक सुस्ती के बीच भारत के निर्यात को नई दिशा: नए बाजारों ने संभाली कमान

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पारंपरिक बाजारों में घटती मांग के बावजूद भारतीय निर्यात क्षेत्र ने अभूतपूर्व मजबूती का प्रदर्शन किया है। चालू वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड स्तर की ओर अग्रसर है। इस विकास दर के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय निर्यातकों द्वारा अमेरिका और यूरोप जैसे पारंपरिक सहयोगियों से आगे बढ़कर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे नए तथा उभरते बाजारों पर ध्यान केंद्रित करना है।

मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) और बाजार विविधीकरण की रणनीति

हाल के वर्षों में भारत द्वारा हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs)—जैसे यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ओमान और मॉरीशस के साथ समझौते—ने भारतीय वस्तुओं को नए बाजारों तक आसान और शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की है।

  • गैर-पारंपरिक बाजारों में उछाल: अफ्रीका के तंजानिया और दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम और मलेशिया, तथा लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय सामानों की मांग में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • उत्पादों की विविधता (Product Diversification): पहले केवल कृषि उत्पादों और वस्त्रों पर निर्भर रहने वाला भारत अब नए बाजारों में इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स (विशेषकर मोबाइल फोन), फार्मास्यूटिकल्स, और रसायन का भारी मात्रा में निर्यात कर रहा है।

  • एमएसएमई (MSME) को प्रोत्साहन: सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना और ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट हब्स की मदद से छोटे उद्योग भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बना रहे हैं।

यह रणनीतिक बदलाव न केवल भारत के व्यापार घाटे को संतुलित करने में मदद कर रहा है, बल्कि भारत को $1 ट्रिलियन के वार्षिक निर्यात लक्ष्य के और करीब ले जा रहा है।

Tags: India
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