बिहार के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए राज्य के प्रसिद्ध भौगोलिक संकेत (GI) प्राप्त 'मिथिला मखाना' (Mithila Makhana) की पहली व्यावसायिक वाणिज्यिक खेप को आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना कर दिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष निर्यात कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस हरी झंडी दिखाई। यह कदम भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर ब्रांड के रूप में स्थापित करने और बिहार के स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयासों का एक बड़ा प्रमाण है।
मिथिला मखाना अपनी अनूठी जैविक गुणवत्ता, प्राकृतिक कुरकुरेपन, उच्च प्रोटीन और उत्कृष्ट पोषण मान के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। ऑस्ट्रेलिया के कड़े फाइटोसैनिटरी और खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए मखाने की इस खेप की ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, वैक्यूम पैकेजिंग और गुणवत्ता जांच दरभंगा स्थित आधुनिक मखाना प्रोसेसिंग क्लस्टर में की गई। इस प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय निर्यात से मिथिलांचल क्षेत्र के दरभंगा, मधुबनी, सहरसा और समस्तीपुर जिलों के हजारों मखाना उत्पादक किसानों, मल्लाह समुदाय और स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को सीधा आर्थिक लाभ और उचित मूल्य मिलना सुनिश्चित होगा।
वैश्विक बाजार में भारतीय सुपरफूड्स की बढ़ती मांग
हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण (health and wellness) बाजार में मखाना को एक उत्कृष्ट 'सुपरफूड' और ग्लूटन-फ्री स्नैक के रूप में अत्यधिक लोकप्रियता हासिल हुई है। अपेडा के अध्यक्ष ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न के प्रमुख रिटेल स्टोरों और सुपरमार्केटों में यह खेप उपलब्ध कराई जाएगी। ऑस्ट्रेलिया के बाद अब संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और मध्य पूर्व के देशों में भी जीआई-टैग मिथिला मखाना के सीधे निर्यात की ठोस कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है।
बिहार राज्य सरकार ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मखाना विकास योजना के तहत राज्य में और अधिक प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाइयां स्थापित करने के लिए वित्तीय सब्सिडी की घोषणा की है। सरकार का उद्देश्य मखाना किसानों को बिचौलियों के जाल से निकालकर सीधे अंतरराष्ट्रीय निर्यातकों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ना है, जिससे बिहार का यह पारंपरिक उत्पाद वैश्विक पटल पर राज्य की नई पहचान बन सके।