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बिजली संकट गहराया: राजस्थान में बिजली संकट के बीच छत्तीसगढ़ से कोयले की आपूर्ति बाधित

राजस्थान में पहले से ही बिजली का भारी संकट चल रहा है, और अब कोयले की कमी ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। छत्तीसगढ़ स्थित माइनिंग क्षेत्रों में भारी बारिश और जलभराव के कारण कोयले की ढुलाई और आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

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Ankit Yadav
09 सित 2026, 11:43
बिजली संकट गहराया: राजस्थान में बिजली संकट के बीच छत्तीसगढ़ से कोयले की आपूर्ति बाधित
राजस्थान इस समय गंभीर बिजली संकट के दौर से गुजर रहा है, और इस स्थिति को सुधारने के प्रयासों को उस समय बड़ा झटका लगा जब छत्तीसगढ़ से होने वाली कोयले की आपूर्ति में भारी बाधा उत्पन्न हो गई। राज्य के विभिन्न थर्मल पावर प्लांटों को लगातार ईंधन की जरूरत होती है ताकि निर्बाध बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके, लेकिन छत्तीसगढ़ की खदानों से रैक समय पर न पहुंच पाने के कारण हालात चिंताजनक हो गए हैं। इस संकट ने आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक की नींद उड़ा दी है क्योंकि बिजली कटौती का असर हर क्षेत्र पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

छत्तीसगढ़ में बारिश और जलभराव मुख्य कारण

छत्तीसगढ़ के प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी मानसूनी बारिश के कारण खदानों के भीतर भारी मात्रा में पानी भर गया है। ओपन-कास्ट माइंस में पानी भर जाने की वजह से भारी मशीनों और एक्सकेवेटर्स की मदद से होने वाला खनन कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गया है। खदानों के अंदर पानी भर जाने के अलावा परिवहन मार्गों पर कीचड़ और खराब रास्तों की वजह से ट्रकों और मालगाड़ियों तक कोयला लोड करके भेजने की प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है। स्थानीय प्रशासन और खनन कंपनियां पानी को बाहर निकालने के लिए लगातार पंपों का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण राहत कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान के बिजली संयंत्रों के लिए छत्तीसगढ़ के इन कोयला क्षेत्रों से नियमित रूप से ईंधन की खेप भेजी जाती है, लेकिन परिवहन व्यवस्था गड़बड़ा जाने से बिजलीघरों का कोयला स्टॉक तेजी से न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। यदि आने वाले कुछ दिनों में मौसम में सुधार नहीं होता है और खदानों से आपूर्ति सामान्य नहीं की जाती है, तो राज्य के कई बड़े पावर प्लांटों को कोयले के अभाव में उत्पादन बंद करना पड़ सकता है, जिससे स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। ऊर्जा विभाग और संबंधित अधिकारी इस आपात स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं ताकि किसी तरह बिजली ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित किया जा सके। दूसरी ओर, राज्य के कई जिलों में पहले से ही बिजली कटौती का सामना कर रहे उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। किसानों को कृषि कार्यों के लिए और शहरी इलाकों में घरेलू उपयोग के लिए सुचारू बिजली आपूर्ति मिलना मुश्किल हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि तुरंत प्रभाव से अन्य स्रोतों से कोयले का प्रबंध नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में औद्योगिक उत्पादन और सामान्य जनजीवन पर इसका और अधिक बुरा असर पड़ेगा। प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और मौसम साफ होने तथा खनन क्षेत्रों से पानी पूरी तरह निकलने के बाद ही आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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