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महाराष्ट्र में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी: 11 अगस्त से लागू होंगी नई दरें

महाराष्ट्र के प्रमुख दुग्ध सहकारी संघों ने चारे की बढ़ती लागत और परिवहन खर्च का हवाला देते हुए दूध के दामों में इजाफा करने का फैसला किया है।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 16:44
महाराष्ट्र में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी: 11 अगस्त से लागू होंगी नई दरें

महाराष्ट्र के करोड़ों आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर एक बार फिर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने जा रहा है। राज्य के प्रमुख दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों, जिनमें अमूल, गोकुल, वारणा और निजी डेयरी ब्रांड शामिल हैं, ने सर्वसम्मति से दूध की खुदरा दरों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का सामूहिक निर्णय लिया है। राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक संघ की बैठक में पारित इस निर्णय के अनुसार, नई दरें 11 अगस्त से पूरे महाराष्ट्र में प्रभावी हो जाएंगी। इस मूल्य वृद्धि के दायरे में टोंड, डबल टोंड, फुल क्रीम (बफेलो) और गाय के दूध की सभी प्रमुख श्रेणियां आएंगी।

कीमतों में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताते हुए डेयरी संघों के प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले छह महीनों के दौरान पशु चारे (cattle feed), खली और हरे चारे की कीमतों में 18 से 22 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है। इसके कारण दुग्ध उत्पादक किसानों की दैनिक रखरखाव और दूध उत्पादन लागत काफी बढ़ गई थी, जिससे किसान लंबे समय से खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसके अलावा डीजल और ईंधन की दरों में बदलाव के कारण कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, प्रोसेसिंग और परिवहन खर्च में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते डेयरी उद्योगों पर भारी वित्तीय दबाव बन गया था।

आम जनता में नाराजगी, किसान संगठनों ने किया समर्थन

दूध की कीमतों में अचानक की गई इस बढ़ोतरी पर राज्य भर की उपभोक्ता संरक्षण समितियों, गृहिणियों और आम नागरिकों ने कड़ी चिंता और नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि दूध जैसी अनिवार्य दैनिक वस्तु के महंगे होने से बच्चों के पोषण और रसोई के बजट पर सीधा असर पड़ेगा। उपभोक्ता संगठनों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर दरों को नियंत्रित करने की गुहार लगाई है।

दूसरी ओर, किसान संगठनों और दुग्ध उत्पादक संघों ने इस वृद्धि को पूरी तरह जायज ठहराया है। उनका तर्क है कि बढ़ी हुई खुदरा दर का बड़ा हिस्सा सीधा दूध उत्पादक किसानों को खरीद दर (procurement price) के रूप में हस्तांतरित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। डेयरी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि भविष्य में मानसून की स्थिति में सुधार होने से हरे चारे की उपलब्धता बढ़ती है और लागत घटती है, तो दरों की पुनः समीक्षा की जा सकती है।

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