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मेरठ में किसानों ने कृषि कानूनों और खाद की किल्लत को लेकर कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में यूरिया खाद की भारी किल्लत और किसानों की अन्य लंबित मांगों को लेकर विभिन्न किसान संगठनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 17:25
मेरठ में किसानों ने कृषि कानूनों और खाद की किल्लत को लेकर कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

पश्चिमी उत्तर Pradesh के मेरठ जिले में कृषि संबंधी समस्याओं को लेकर किसानों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। भारतीय किसान यूनियन और अन्य स्थानीय संगठनों के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुए और सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों का मुख्य आरोप है कि वर्तमान में धान और गन्ने की फसल के लिए बेहद जरूरी यूरिया और डीएपी खाद की बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है, जिसके कारण उन्हें निर्धारित मूल्य से अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं या लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके अलावा, गन्ने के बकाया भुगतान में देरी, आवारा पशुओं द्वारा फसल को नुकसान पहुंचाने और नलकूपों के बिजली बिलों में राहत देने जैसी पुरानी मांगें भी अब तक पूरी न होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है।

प्रशासन को सौंपा गया मांग पत्र, त्वरित कार्रवाई का आश्वासन

प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर किसानों और पुलिस बल के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई, लेकिन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और किसानों को शांत कराया। किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि एक सप्ताह के भीतर खाद की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाई गई और सहकारी समितियों पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जिलाधिकारी ने किसानों की सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि खाद की कालाबाजारी करने वाले डीलरों के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा तुरंत छापेमारी की जाएगी और दोषियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।

इस प्रदर्शन के कारण मेरठ शहर के कई मुख्य मार्गों पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, जिसे ट्रैफिक पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सुचारू कराया। कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी ब्लॉकों में खाद वितरण प्रणाली पर कड़ी नजर रखें ताकि किसी भी किसान को असुविधा न हो। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और यदि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे हाईवे जाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

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