नेपाल में बाढ़ : चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया
Balen Shah India: भारत ने बाढ़ के महासंकट में निभाई दोस्ती, नेपाली PM बालेन शाह पहले विदेशी दौरे पर आएंगे दिल्ली
Raksha Bandhan 2026 Wishes: बड़े भाई से छोटे भाई तक, हर रिश्ते के लिए भेजें ये खास मैसेज, दिल में घुल जाएगा...
सोनिया गांधी की किताब में क्या है कि पेंगुइन ने छापने से किया इनकार, कौन सा हिस्सा हटाने को कहा
कैलाश मानसरोवर यात्रा का तिब्बत रूट कितना मुश्किल है, रास्ते में क्या चुनौतियां आती हैं?
₹22,000 करोड़ के कर्ज का सिर्फ ₹6.5 करोड़ में निपटारा: NCLT ने सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी;...
अभिजीत दीपके ने अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया! सर्वे में CJP चीफ ने चौंकाया
CM विजय तय सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठे: सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया, तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा पह...
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा: सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की MPMS 2.0 योजना की शुरुआत की
भारत में मोबाइल निर्माण को नई ऊंचाइयां देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े कदम के तहत 62,500 करोड़ रुपये की MPMS 2.0 योजना का ऐलान किया है, जिससे घरेलू ब्रांड्स और स्थानीय कलपुर्जों के उत्पादन को भारी बढ़ावा मिलेगा।
A
Ankit Yadav
22 अग 2026, 12:56
भारतीय प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बेहद अहम मोड़ पर, देश में मोबाइल उत्पादन को अभूतपूर्व विस्तार देने के उद्देश्य से एक नई और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई है। इस ताज़ा पहल के तहत, सरकार ने कुल 62,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली एमपीएमएस 2.0 (MPMS 2.0) स्कीम को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य देश के भीतर ही उन्नत तकनीकों के साथ मोबाइल फोन बनाने की क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हब के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर सके।
घरेलू कंपनियों और स्थानीय घटकों पर विशेष ध्यान
इस नई नीतिगत रूपरेखा के केंद्र में स्वदेशी ब्रांडों को सशक्त करना और स्थानीय स्तर पर कलपुर्जों यानी कॉम्पोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा देना है। अब तक भारतीय बाजार में विदेशी निर्माताओं का बड़ा दबदबा रहा है, लेकिन इस स्कीम के जरिए सरकार का प्रयास है कि घरेलू उद्यम आगे आएं और आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत हिस्सेदारी दर्ज करें। योजना के प्रावधानों के तहत उन उद्योगों को प्राथमिकता और प्रोत्साहन दिया जाएगा जो देश के भीतर ही डिस्प्ले, बैटरी, और अन्य महत्वपूर्ण मोबाइल पार्ट्स का निर्माण करते हैं। इससे आयात पर निर्भरता में भारी कमी आएगी और देश में ही एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम का विकास हो सकेगा।
रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से भी इस मेगा स्कीम को गेम-चेंजर माना जा रहा है। जब देश के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल और उसके कलपुर्जों की फैक्ट्रियां लगेंगी, तो लाखों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वित्तीय पैकेजों से देश में युवाओं के लिए कौशल विकास के नए रास्ते खुलेंगे और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में कुशल कामगारों की मांग पूरी की जा सकेगी। सरकार का यह कदम 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने में मददगार साबित होगा।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह
जैसे ही इस योजना की घोषणा हुई, देश के तकनीकी और व्यावसायिक हलकों में इसका स्वागत किया गया। उद्योग संघों और प्रमुख विनिर्माताओं का कहना है कि 62,500 करोड़ रुपये का यह भारी-भरकम फंड उन बाधाओं को दूर करने में कारगर होगा जिनका सामना घरेलू कंपनियां अक्सर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौरान करती हैं। आने वाले महीनों में इस योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जिसके बाद विभिन्न कंपनियां इसके तहत आवेदन कर सकेंगी और सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता और अन्य रियायतों का लाभ उठा पाएंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि यह नीति देश को आने वाले कुछ वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल निर्यातक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।