देश के लाखों छोटे करदाताओं, स्टार्ट-अप्स और व्यावसायिक संस्थाओं को टैक्स अनुपालन में बड़ी राहत देने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय ने संसद में घोषणा की है कि ऑनलाइन निम्न या शून्य टीडीएस कटौती प्रमाणपत्र (Lower or Nil TDS Certificate) जारी करने से जुड़े नए पारदर्शी नियमों को बहुत जल्द लागू किया जाएगा। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आयकर अधिनियम 2025 की धारा 395(1) के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए पूरी प्रक्रिया को शत-प्रतिशत डिजिटल, त्वरित और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त (faceless) बनाने का खाका तैयार कर लिया गया है।
वित्त अधिनियम 2026 के माध्यम से केंद्र सरकार ने करदाताओं पर प्रशासनिक दबाव और भौतिक कागजी प्रक्रियाओं के बोझ को कम करने का कानूनी ढांचा तैयार किया था। इसके तहत अब व्यवसायी और व्यक्तिगत करदाता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से सीधे इलेक्ट्रॉनिक रूप से निम्न टीडीएस दर के लिए आवेदन जमा कर सकेंगे। वित्त राज्य मंत्री ने संसद को आश्वस्त किया कि प्रासंगिक सक्षम नियम (enabling rules) वर्तमान में अपने अंतिम चरण में हैं और इसी महीने आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचित कर दिए जाएंगे, जिसके बाद पूरी प्रणाली ऑनलाइन चालू हो जाएगी।
करदाताओं को मिलेगा पारदर्शी और समयबद्ध समाधान
आयकर विशेषज्ञों और टैक्स प्रैक्टिशनर्स का मानना है कि इस नई ई-प्रणाली के लागू होने से करदाताओं को स्थानीय कर कार्यालयों और निर्धारण अधिकारियों (Assessing Officers) के दफ्तरों के चक्कर लगाने से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में प्रमाणपत्र जारी होने में हफ्तों का समय लग जाता था, जिससे कई कंपनियों की कार्यशील पूंजी (working capital) ब्लॉक हो जाती थी। नई प्रणाली के तहत आवेदनों का निस्तारण एक निर्धारित समय सीमा (SLA) के भीतर करना अनिवार्य होगा।
यदि किसी कारणवश कोई आवेदन खारिज या संशोधित किया जाता है, तो निर्धारण अधिकारी को उसका स्पष्ट और तर्कसंगत कारण ई-फाइलिंग पोर्टल पर दर्ज करना होगा, जिसे करदाता तुरंत देख सकेंगे। उद्योग जगत ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि यह 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की दिशा में एक अत्यंत व्यावहारिक कदम है। इससे विशेष रूप से उन निर्यातकों और सेवा प्रदाताओं को लाभ होगा जिनकी कर देनदारी कम होती है लेकिन टीडीएस अधिक कट जाता था।