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रक्षा क्षेत्र में भागीदारी: कानपुर की ग्लाइडर्स इंडिया ने एमएसएमई कॉन्क्लेव में बढ़ाई हिस्सेदारी

कानपुर की प्रमुख रक्षा कंपनी ग्लाइडर्स इंडिया ने हाल ही में आयोजित डिफेंस एमएसएमई कॉन्क्लेव के दौरान रक्षा क्षेत्र में लघु एवं मध्यम उद्यमों की भागीदारी को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 11:20
रक्षा क्षेत्र में भागीदारी: कानपुर की ग्लाइडर्स इंडिया ने एमएसएमई कॉन्क्लेव में बढ़ाई हिस्सेदारी
रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से देश भर में विभिन्न पहलों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में आयोजित किए गए डिफेंस एमएसएमई कॉन्क्लेव ने उद्योग जगत के दिग्गजों और छोटे उद्यमों को एक मंच पर लाने का काम किया है। इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर स्थित ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड ने अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराते हुए रक्षा उत्पादन आपूर्ति श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी पर विशेष बल दिया है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर और स्थानीय निर्माताओं को साथ लेकर देश की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयां दी जा सकती हैं।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम

मौजूदा समय में भारत सरकार द्वारा रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र के साथ-साथ एमएसएमई सेक्टर का सहयोग बेहद आवश्यक माना गया है। कॉन्क्लेव के दौरान हुई चर्चाओं में इस बात पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया कि कैसे छोटे उद्यमी रक्षा साजो-सामान और उपकरणों के कलपुर्जे बनाने में अपनी दक्षता का विस्तार कर सकते हैं। ग्लाइडर्स इंडिया जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के शामिल होने से नए और उभरते हुए उद्यमियों का मनोबल ऊंचा हुआ है, जिससे उन्हें रक्षा मंत्रालय के कड़े गुणवत्ता मानकों और उत्पादन आवश्यकताओं को समझने में आसानी होगी।

क्षेत्रीय विकास और रोजगार के नए अवसर

इस प्रकार के सम्मेलनों के आयोजन से न केवल रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के ढेरों नए अवसर भी सृजित होते हैं। कानपुर जैसे पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों में एमएसएमई इकाइयों के पास रक्षा विनिर्माण से जुड़कर अपनी व्यावसायिक क्षमता को बढ़ाने का यह एक सुनहरा मौका है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न औद्योगिक संगठनों और सरकारी अधिकारियों ने आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के तौर-तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया ताकि एमएसएमई को फंड और तकनीकी सहायता आसानी से उपलब्ध कराई जा सके। आने वाले दिनों में इस तरह की पहलों से देश की रक्षा अर्थव्यवस्था को एक मजबूत गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर रक्षा उपकरणों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी पहचान को और अधिक पुख्ता कर सकेगा।
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