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शहरी विकास की नई रूपरेखा: देश में अनियोजित फैलाव को रोकने के लिए राष्ट्रीय शहरीकरण परिषद की मांग

देश के तेजी से बढ़ते शहरों की समस्याओं से निपटने और भविष्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक शीर्ष निकाय के गठन की सिफारिश की गई है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 17:54
शहरी विकास की नई रूपरेखा: देश में अनियोजित फैलाव को रोकने के लिए राष्ट्रीय शहरीकरण परिषद की मांग
भारत में जिस प्रकार से महानगरों और टियर-2 शहरों का तेजी से भौगोलिक विस्तार हो रहा है, उसने शहरी योजनाकारों और नीति निर्माताओं के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन सभी समस्याओं का समग्र और वैज्ञानिक समाधान ढूंढने के लिए एक हालिया रिपोर्ट में देश के स्तर पर एक 'राष्ट्रीय शहरीकरण परिषद' (National Urbanisation Council) के गठन की जोरदार वकालत की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल की भारी कमी है, जिसके कारण यातायात जाम, प्रदूषण, और बुनियादी सुविधाओं का अभाव जैसी समस्याएं विकराल रूप लेती जा रही हैं। यदि समय रहते एक केंद्रीय समन्वय संस्था नहीं बनाई गई, तो भविष्य में भारत के शहरी केंद्रों का प्रबंधन पूरी तरह से असंभव हो जाएगा।

महानगरों की बढ़ती समस्याएं

देश के प्रमुख शहरी केंद्रों में जनसंख्या का भारी दबाव और जमीन की अंधाधुंध कम होती उपलब्धता ने पर्यावरण और जीवन स्तर दोनों को गहरे संकट में डाल दिया है। अनियोजित निर्माण और कंक्रीट के जंगलों में बदलते पारंपरिक मोहल्ले जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और अधिक गंभीर बना रहे हैं। इस नई रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि परिषद के माध्यम से देश के सभी राज्यों को एक समान और आधुनिक शहरी विकास नीति के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि जल निकासी, हरित क्षेत्रों के संरक्षण और किफायती आवास जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सके। उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी बताया है।

भविष्य की योजना और क्रियान्वयन

किसी भी देश की आर्थिक रीढ़ उसके शहर होते हैं, और यदि वे शहर ही कुप्रबंधन के शिकार हो जाएं तो देश की प्रगति की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इस प्रस्तावित परिषद का मुख्य कार्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सेतु का काम करना होगा, जो शहरी भूमि उपयोग और परिवहन प्रणालियों की नियमित समीक्षा करेगा। नीति आयोग और अन्य शहरी विकास संस्थानों को उम्मीद है कि इस सिफारिश पर सरकार जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगी। अगर आने वाले वर्षों में इस तरह की एक प्रभावी संस्था जमीन पर उतरती है, तो भारत के शहर न केवल रहने योग्य बनेंगे बल्कि वे आधुनिक तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल विकास के वैश्विक उदाहरण भी पेश कर सकेंगे।
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