बुधवार के कारोबारी सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 850 अंक बढ़कर 85,200 के स्तर पर बंद हुआ। इस उछाल का मुख्य कारण घरेलू आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीदें हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी भारतीय बाजार में भारी मात्रा में निवेश किया है, जिससे तरलता की स्थिति में सुधार हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह सकारात्मक रुख कम से कम अगले कुछ हफ्तों तक बने रहने की संभावना है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे मिड-कैप शेयरों पर भी नजर रखें।
आईटी सेक्टर का दबदबा निफ्टी आईटी इंडेक्स में आज 3.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसका नेतृत्व टीसीएस और इंफोसिस ने किया। इन कंपनियों के नए क्लाउड-आधारित सौदों की घोषणा के बाद से इनके शेयरों के भाव में तेजी देखी गई है। अन्य क्षेत्रों जैसे बैंकिंग और ऑटोमोबाइल में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन आईटी सेक्टर ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया है। यह तेजी इस बात का संकेत है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय टेक कंपनियां मजबूत स्थिति में बनी हुई हैं।
निवेशकों के लिए सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब नई सपोर्ट लेवल बना चुका है, जो निवेशकों को सुरक्षित महसूस करा रहा है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को अत्यधिक उत्साह में आकर रिस्की शेयरों में निवेश करने से बचने की सलाह दी गई है। बाजार में वॉल्यूम बढ़ने का मतलब यह है कि संस्थागत खिलाड़ी काफी सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। धैर्य रखना ही इस समय सबसे बेहतर निवेश रणनीति हो सकती है।