टाण्डा फायरिंग रेंज में अभ्यास कार्यक्रम की पूरी जानकारी
टाण्डा फायरिंग रेंज में आगामी 5 और 6 अक्टूबर को गोलियां चलाने का विशेष अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। भारतीय सैन्य पुलिस इस निर्धारित अवधि के दौरान अपनी सामरिक तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए यह प्रशिक्षण पूरा करेगी। इस फायरिंग अभ्यास के संचालन का समय सुबह 8 बजे से शुरू होकर रात को 10 बजे तक तय किया गया है। कांगड़ा के सहायक आयुक्त यानी उपायुक्त विवेक चौहान ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर सभी जरूरी जानकारियां साझा की हैं। सैन्य पुलिस द्वारा किए जाने वाले इस बड़े अभ्यास को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से पूरी तरह बचा जा सके। प्रशिक्षण के इन दोनों दिनों में रेंज के भीतर और आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा पहरा रहेगा ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति उस वर्जित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके।
प्रशासन की ओर से नागरिकों और पशुपालकों के लिए सख्त निर्देश
सहायक आयुक्त विवेक चौहान ने सुरक्षा के कड़े दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए आसपास के गांवों के सभी निवासियों को सचेत किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि निर्धारित फायरिंग प्रशिक्षण के समय कोई भी व्यक्ति गलती से भी फायरिंग रेंज के आसपास न जाए। इसके साथ ही पशुपालकों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने मवेशियों को चराने के लिए उस खतरनाक इलाके में बिल्कुल न भेजें। सैन्य अभ्यास के दौरान संभावित खतरों से बचने के लिए नागरिकों से आपसी सतर्कता बनाए रखने की जोरदार अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि हर एक ग्रामीण को इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि अभ्यास के दौरान उस तरफ जाना जानलेवा साबित हो सकता है। लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों और आसपास के दूसरे लोगों को भी इस खतरे के प्रति पूरी तरह सतर्क रखें। नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक निगरानी भी लगातार बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी लापरवाही को समय रहते रोका जा सके।
प्रभावित होने वाले निकटवर्ती गांवों की सूची और सुरक्षा उपाय
इस सैन्य अभ्यास के दौरान सुरक्षा घेरे के दायरे में आने वाले प्रमुख निकटवर्ती गांवों के नाम भी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से जारी कर दिए हैं। कोहाला, कच्छयारी, खोली तथा घुरकड़ी गांवों के तमाम लोगों को विशेष रूप से आगाह किया गया है कि वे पूरी सावधानी बरतें। इन चारों गांवों की भौगोलिक स्थिति फायरिंग रेंज के बेहद करीब है इसलिए वहां खतरा सबसे ज्यादा बना रहता है। जिला प्रशासन और सैन्य अधिकारियों की संयुक्त टीम लगातार इन इलाकों में नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को टाला जा सके। अभ्यास पूरा होने के बाद ही इन क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियों को फिर से पूरी तरह बहाल किया जाएगा। स्थानीय लोग प्रशासन के इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इस दो दिवसीय अभ्यास में पूरा सहयोग दे रहे हैं। इस प्रकार की सुरक्षात्मक चेतावनियों का मुख्य उद्देश्य जनता के जानमाल की पुख्ता रक्षा करना है ताकि सैन्य प्रशिक्षण का यह कार्यक्रम बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।