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शांति संदेश: पद्मश्री मोहन नागर ने कहा कि भारत मानवता का मार्ग दिखा सकता है
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक महत्वपूर्ण विचार सामने आया है, जहाँ प्रतिष्ठित व्यक्तित्व पद्मश्री मोहन नागर ने देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित करते हुए वैश्विक स्तर पर शांति और मानवता का संदेश दिया है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 12:18
वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया विभिन्न प्रकार के भू-राजनीतिक तनावों, संघर्षों और मानवीय संकटों से जूझ रही है, तब भारत की प्राचीन दार्शनिक और सांस्कृतिक मूल्य अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी लखनऊ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान, पद्मश्री मोहन नागर ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्र के रूप में भारत के पास पूरी दुनिया को शांति और बंधुत्व का मार्ग दिखाने की असीम क्षमता है। उन्होंने कहा कि हमारी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि हमेशा से सहिष्णुता, करुणा और 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी पृथ्वी ही हमारा परिवार है, की भावना पर आधारित रही है।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका और सांस्कृतिक विरासत
भारतीय संस्कृति की यह विशेषता रही है कि उसने कभी भी आक्रामकता का समर्थन नहीं किया, बल्कि हमेशा से संवाद, संयम और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया है। पद्मश्री मोहन नागर का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार ऐसे नेतृत्व और वैचारिक दिशा की तलाश कर रहा है जो वैमनस्य को कम कर सके। वक्ता ने इस बात को विस्तार से समझाया कि कैसे हमारे आध्यात्मिक ग्रंथ, मूल्य और परंपराएं आधुनिक युग की जटिल समस्याओं का समाधान प्रदान कर सकती हैं। उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आए विचारकों और बुद्धिजीवियों ने उनके इस विचार का समर्थन किया है कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और यही विविधता दुनिया को जोड़ने का काम कर सकती है।
आधुनिक विकास की दौड़ में मानवीय मूल्यों को बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे दौर में जब भौतिकवाद और तकनीकी प्रगति ने मनुष्य को आपस में जोड़ने के साथ-साथ दूर भी कर दिया है, भारतीय विचार दुनिया भर के लोगों को एक नई दिशा दे सकते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रतिष्ठित जनों ने भी इस बात पर सहमति व्यक्त की कि देश के युवाओं को अपनी समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए। पद्मश्री मोहन नागर के इन विचारों से न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक पैमाने पर लोगों में यह चेतना जागृत हुई है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व ही भविष्य के निर्माण का एकमात्र साधन है। आने वाले दिनों में इस तरह के सांस्कृतिक और वैचारिक संवादों से समाज में सकारात्मक बदलाव आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।