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आर्थिक संकट: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एस जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर जताई चिंता और तकनीक को बताया उम्मीद की किरण

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया भर में मंडरा रहे आर्थिक खतरों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

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Ankit Yadav
11 सित 2026, 14:38
आर्थिक संकट: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एस जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर जताई चिंता और तकनीक को बताया उम्मीद की किरण
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक पटल पर चर्चा करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न हो रही गंभीर वित्तीय और आर्थिक परेशानियों के प्रति सभी का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि मौजूदा दौर में दुनिया कई प्रकार की पेचीदगियों से गुजर रही है, जिससे विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के सामने नए किस्म के संकट खड़े हो रहे हैं। इस मंच से उन्होंने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि वैश्विक प्रणाली को इन बाधाओं से पार पाने के लिए आपसी सहयोग और ठोस रणनीतिक पहलों की अत्यंत आवश्यकता है।

तकनीक बनी बड़ी उम्मीद

वर्तमान समय की अनिश्चितताओं के बीच विदेश मंत्री ने आधुनिक तकनीक और इनोवेशन को एक बहुत बड़ी उम्मीद के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका यह मानना था कि डिजिटल परिवर्तन और उन्नत तकनीकी समाधान ही वे माध्यम हैं जो मंदी के बादलों के बीच विकास को गति दे सकते हैं और आम जनजीवन को सुगम बना सकते हैं। ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भारत हमेशा से अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। सम्मेलन के दौरान इस बात को प्रमुखता से रखा गया कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो यह न केवल वित्तीय असमानताओं को पाटने का काम करेगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। पारंपरिक आर्थिक व्यवस्थाएं आज के समय में सप्लाई चेन के टूटने, महंगाई और अन्य बाहरी झटकों के कारण भारी दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में वैश्विक समुदाय को अपनी नीतियों में बदलाव करने की जरूरत है ताकि आने वाले दिनों में किसी भी बड़े आर्थिक व्यवधान से निपटा जा सके। ब्रिक्स जैसे बड़े और प्रभावशाली मंच पर इस प्रकार के मुद्दों का उठाया जाना यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक मंचों पर अपनी बात को मुखरता से रख रहा है और एक संतुलित तथा समावेशी दृष्टिकोण की वकालत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन में आए विचारों और चर्चाओं से भविष्य की नीतियों को एक नई दिशा मिलेगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केवल पारंपरिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय नए जमाने के तकनीकी उपकरणों और डिजिटल टूल्स को अपनाना अनिवार्य हो गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिक्स देश मिलकर इन आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए किस प्रकार की साझा कार्ययोजना तैयार करते हैं और तकनीक का उपयोग किस हद तक धरातल पर उतारा जाता है।
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