अंतरराष्ट्रीय मदद लेने का फ़ैसला नेपाल ने एक ही दिन में क्यों बदला, वहाँ के मीडिया में कैसी चर्चा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में प्रोग्राम और ज़ोहरान ममदानी के विरोध पर अमेरिकी मीडिया में कैसी बहस
'वही रहेंगे या मैं ही रहूंगा', JU पर आगबबूला शुभेंदु अधिकारी बोले- इनको JNU की तरह ठीक कर दो
भाड़े के पैसों से गुजारा कर रहे सुभाष चंद्रा, बोले- आधा घर किराए पर दे दिया है
महाराष्ट्र में दूध हुआ महंगा, 9 रुपये प्रति लीटर बढ़े दाम
योगी से बैर नहीं, BJP विधायकों की खैर नहीं; पंजाब में भगवंत मान का क्या हाल? सर्वे ने बताया
'खड़गे के मंच का शुद्धिकरण करने वालों पर FIR करने का आदेश दें पीएम', राहुल गांधी की मांग
आंध्र प्रदेश: तीन साल के बच्चे को पुल पर अकेला रोता छोड़ पति-पत्नी ने लगाई गोदावरी नदी में छलांग, तलाश जारी
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
गांव की मिट्टी से राष्ट्रीय मंच तक लोक कलाकारों का प्रेरणादायक सफर, आकाशवाणी ने सहेजी भारतीय लोकसंस्कृति और पारंपरिक कलाओं की अनमोल विरासत
लोककला और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी कला साधना के जरिए कलाकारों ने किस प्रकार आकाशवाणी जैसे प्रतिष्ठित माध्यम तक अपनी पहुंच बनाई, इसकी एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है।
A
Ankit Yadav
29 अग 2026, 11:06
भारतीय संस्कृति की असली आत्मा देश के गाँवों और उसकी मिट्टी से जुड़ी लोककलाओं में बसती है। छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में सदियों से चली आ रही लोक परंपराओं को सहेजने वाले कलाकारों का सफर बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। ऐसी ही एक कलात्मक यात्रा का जिक्र हाल ही में प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया गया है, जिसमें ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले कलाकारों के समर्पण को रेखांकित किया गया है। इन कलाकारों ने अपनी कठिन साधना के बल पर न केवल अपनी कला को जीवित रखा, बल्कि उसे आधुनिक संचार के सबसे बड़े माध्यमों तक भी पहुँचाया।
लोकसंस्कृति का संरक्षण और कलाकारों का संघर्ष
पारंपरिक कलाओं को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाना किसी तपस्या से कम नहीं है। आधुनिकता की दौड़ में जहाँ एक ओर युवा पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं, वहीं कुछ समर्पित कलाकार अपनी जड़ों को मजबूत थामे हुए हैं। स्थानीय लोकगीत, लोकनृत्य और नाट्य विधाओं के माध्यम से ये कलाकार अपनी माटी की खुशबू को दुनिया तक पहुँचाते हैं। आकाशवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने हमेशा से ही देश की इस सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और प्रसारित करने में अहम भूमिका निभाई है। जब एक लोक कलाकार अपनी कला के दम पर आकाशवाणी के स्टूडियो तक पहुँचता है, तो वह केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि पूरी लोकसंस्कृति की विजय होती है।
आकाशवाणी ने ऐतिहासिक रूप से देश के कोने-कोने से छुपी हुई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने का कार्य किया है। क्षेत्रीय बोलियों, पारंपरिक धुनों और विलुप्त हो रही लोक कलाओं को रिकॉर्ड कर उन्हें संरक्षित करने का यह मंच इन कलाकारों के लिए वरदान साबित हुआ है। जब ग्रामीण अंचलों के कलाकार बड़े मंचों पर अपनी प्रस्तुति देते हैं, तो इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि समाज में लोककला के प्रति सम्मान भी गहरा होता है। आज के समय में ऐसे कलाकारों की जीवनयात्रा युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा संदेश है कि लगन और मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
भविष्य की दिशा और सांस्कृतिक धरोहर का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोककलाओं को बचाए रखना है, तो कलाकारों को उचित मान-सम्मान और मंच मिलना बेहद आवश्यक है। डिजिटल युग के इस दौर में जहाँ हर चीज बहुत तेजी से बदल रही है, वहीं पारंपरिक कलाओं का डिजिटल अभिलेखीकरण भी समय की मांग बन गया है। आकाशवाणी और अन्य सार्वजनिक प्रसारकों के माध्यम से इन कलाओं का प्रसारण होने से यह भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो जाती हैं। आने वाले समय में यह जरूरी है कि नई पीढ़ी पारंपरिक लोककलाओं को सीखे और अपनी सांस्कृतिक पहचान को भूला न दे। लोककला से आकाशवाणी तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि आपकी कला में सच्चाई और गहराई है, तो बाधाओं के बावजूद सफलता निश्चित रूप से मिलती है।