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सांस्कृतिक उत्सव का शंखनाद: गुजरात के अहमदाबाद में पारंपरिक लोक कला और संगीत महोत्सव का भव्य आगाज

गुजरात के अहमदाबाद शहर में सात दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग शुभारंभ हो गया है, जिसमें देश भर के लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:15
सांस्कृतिक उत्सव का शंखनाद: गुजरात के अहमदाबाद में पारंपरिक लोक कला और संगीत महोत्सव का भव्य आगाज
अहमदाबाद के ऐतिहासिक साबरमती रिवरफ्रंट मैदान पर आज शाम देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित सात दिवसीय भव्य राष्ट्रीय लोक कला और संगीत महोत्सव 'संस्कृति-संगम 2026' का अत्यंत रंगारंग और भव्य शुभारंभ हुआ। इस प्रतिष्ठित महोत्सव में देश के सभी अट्ठारह राज्यों से आए एक हजार से अधिक पारंपरिक लोक कलाकार, हस्तशिल्प कारीगर और शास्त्रीय संगीतज्ञ हिस्सा ले रहे हैं, जो अपनी कला के माध्यम से भारत की विविधता में एकता की अनूठी तस्वीर पेश कर रहे हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान गुजरात के पारंपरिक गरबा, राजस्थान के कालबेलिया, असम के बिहू और पंजाब के भांगड़ा नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित हजारों दर्शकों का मन मोह लिया और पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी

महोत्सव परिसर में देश भर के कारीगरों द्वारा बनाए गए हाथ से बुने हुए वस्त्रों, मिट्टी के सुंदर बर्तनों, लकड़ी के खिलौने और पारंपरिक आभूषणों के सैकड़ों स्टॉल लगाए गए हैं, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए कला प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसके साथ ही, 'फूड कोर्ट' खंड में भारत के विभिन्न प्रांतों जैसे दक्षिण के डोसा, उत्तर की चाट, पश्चिम के ढोकला और पूर्व के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए भी लोगों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो इस आयोजन को एक संपूर्ण पारिवारिक उत्सव बनाती हैं। स्थानीय प्रशासन ने आगंतुकों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं तथा निःशुल्क शटल बस सेवा भी शुरू की गई है।

युवाओं के लिए कार्यशालाएं और प्रतियोगिताएं

इस महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण युवा पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति और लोक कलाओं से जोड़ने के लिए आयोजित की जाने वाली विशेष कार्यशालाएं हैं, जहाँ प्रसिद्ध गुरुओं द्वारा बच्चों को हस्तशिल्प, लोक वाद्य यंत्रों को बजाने और शास्त्रीय नृत्य की बुनियादी शिक्षा दी जा रही है। आयोजकों ने बताया कि इस सप्ताह के दौरान प्रतिदिन शाम को देश के जाने-माने गायक और संगीतकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिनमें लोक संगीत और आधुनिक फ्यूजन संगीत का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल पारंपरिक कलाकारों को एक बड़ा मंच और आर्थिक संबल मिलता है बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी गौरवशाली विरासत को नजदीक से जानने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है।
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