हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पारंपरिक लोक नृत्य प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। इस प्रतिष्ठित आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग पंद्रह सांस्कृतिक दलों के सैकड़ों कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय मुख्य अतिथि और संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ की गई। मंच पर जैसे ही कुल्लवी नाटी, किन्नर नत्य और चंबा के पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियां शुरू हुईं, पूरा रिज मैदान दर्शकों की तालियों और लोक धुनों से गूंज उठा। इस आयोजन को देखने के लिए स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ भारी संख्या में देश-विदेश से आए सैलानी भी पहुंचे हैं।
युवाओं में पारंपरिक कला के प्रति बढ़ रहा है रुझान आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजments का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। आज के इस उद्घाटन सत्र में विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा, जिन्होंने पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोल, नगाड़े और करनाई की थाप पर शानदार प्रस्तुतियां दीं। प्रतियोगिता के पहले दिन सिरमौर और मंडी जिलों के लोक नृत्यों ने विशेष समा बांधा। निर्णायक मंडल में राज्य के प्रसिद्ध लोक कलाकारों और संगीतज्ञों को शामिल किया गया है जो हर प्रस्तुति की बारीकी से जांच कर रहे हैं। महोत्सव के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जिनका लुत्फ पर्यटक और स्थानीय लोग बड़े चाव से उठा रहे हैं।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा और स्थानीय कलाकारों को मंच इस तरह के राज्य स्तरीय आयोजनों से हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग को भी एक नया संबल मिलता है। होटल व्यवसायी संघ और पर्यटन विकास निगम ने इस बात पर प्रसन्नता जताई है कि इस सांस्कृतिक महाकुंभ के कारण शहर के सभी होटल और होमस्टे पूरी तरह बुक हो चुके हैं। स्थानीय कलाकारों का मानना है कि इस मंच के माध्यम से उन्हें न केवल अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिल रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का भी मौका मिल रहा है। यह आयोजन आने वाले तीन दिनों तक चलेगा और समापन समारोह में विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को प्रतिष्ठित सांस्कृतिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।