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युवाओं का विकास: डॉ. शांडिल ने खेलकूद को अनुशासन और नेतृत्व का आधार बताया
खेलकूद केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल जैसे महत्वपूर्ण मानवीय गुणों को भी मजबूत करते हैं। यह बात डॉ. शांडिल ने कही है, जिन्होंने युवाओं के सर्वांगीण विकास में खेलों की अनिवार्य भूमिका पर जोर दिया है।
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Ankit Yadav
14 सित 2026, 12:06
आज के दौर में जब युवा विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब शारीरिक गतिविधियां और खेल उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने का एक बेहतरीन माध्यम साबित हो रहे हैं। डॉ. शांडिल ने हाल ही में अपने संबोधन के दौरान इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि खेल के मैदान पर बिताया गया समय किस प्रकार युवाओं के चरित्र निर्माण में सहायक होता है। जब युवा किसी टीम का हिस्सा बनते हैं, तो वे सामूहिक रूप से काम करना सीखते हैं, जिससे उनमें आपसी सहयोग की भावना प्रबल होती है। इसके अलावा, खेल के मैदान पर हार और जीत को समान भाव से स्वीकार करना युवाओं को जीवन की वास्तविक कठिनाइयों से निपटने के लिए तैयार करता है।
अनुशासन और आत्मविश्वास की नींव
खेलों के जरिए बच्चों और युवाओं में समय की पाबंदी, नियमों का पालन और अपने साथियों के प्रति सम्मान जैसी भावनाएं स्वतः विकसित होने लगती हैं। जब एक खिलाड़ी मैदान पर कड़ा अभ्यास करता है, तो उसका आत्मविश्वास स्वतः ही बढ़ता है। डॉ. शांडिल के अनुसार, यह आत्मविश्वास केवल खेल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता प्राप्त करने की कुंजी बनता है। मैदान पर लिया गया हर एक निर्णय और चुनौती का सामना करने की जिद युवाओं को भविष्य के जिम्मेदार नागरिक और बेहतर नेता के रूप में ढालती है।
टीम भावना और संघर्ष क्षमता का विकास किसी भी खेल की मूल आत्मा होती है। मैदान पर जब खिलाड़ी अपने साथियों के साथ मिलकर रणनीति बनाते हैं और जीत के लिए पसीना बहाते हैं, तो उनके भीतर एक अटूट टीम भावना पैदा होती है। यह भावना उन्हें पेशेवर और सामाजिक जीवन में भी साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इसके साथ ही, कठिन परिस्थितियों में हार न मानने का जज्बा यानी संघर्ष की क्षमता खेलों के माध्यम से ही सबसे बेहतरीन तरीके से सीखी जा सकती है। डॉ. शांडिल ने माना है कि युवाओं को खेलकूद के प्रति प्रोत्साहित करके समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का भी यही मानना है कि अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। देश के विभिन्न हिस्सों में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशा जा सके। डॉ. शांडिल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब युवा पीढ़ी को सही दिशा और मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता है। आने वाले समय में खेल के जरिए युवाओं के सशक्तिकरण के इन अभियानों से देश के खेल जगत और सामाजिक ढांचे दोनों को ही एक नया और सकारात्मक आयाम मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।