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बड़ा वादा अधूरा: हुसैनीवाला बॉर्डर के पास चूहड़ी वाला गांव में नहीं बना मुख्यमंत्री खेल मैदान
हुसैनीवाला बॉर्डर के पास स्थित सरहदी गांव चूहड़ी वाला में मुख्यमंत्री खेल मैदान के निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में निराशा है, क्योंकि काफी समय बीत जाने के बाद भी यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
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Ankit Yadav
03 सित 2026, 11:33
पंजाब के ऐतिहासिक और संवेदनशील हुसैनीवाला बॉर्डर के नजदीक बसे सरहदी गांव चूहड़ी वाला में युवाओं को खेलकूद की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेल मैदान बनाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, लंबे समय का अंतराल बीत जाने के बावजूद इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर किसी प्रकार का ठोस कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस स्थिति के चलते स्थानीय युवाओं और खेल प्रेमियों में स्थानीय प्रशासन और सरकार के प्रति काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरहदी इलाकों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन बुनियादी खेल बुनियादी ढांचे के अभाव में युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और युवाओं को नशे जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रखने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जाती हैं। इसी कड़ी में सरहदी गांवों में खेल स्टेडियम और मैदानों के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी थी, ताकि दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा को निखार सकें। चूहड़ी वाला गांव के निवासियों ने कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। मैदानी स्तर पर काम शुरू न होने के कारण खेल मैदान की जमीन केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है।
युवाओं की उम्मीदों को झटका
सरहदी क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में खेल सुविधाओं का विकास सामरिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गांव के युवाओं का मानना है कि यदि यहां समय पर खेल मैदान बन जाता, तो उन्हें अभ्यास के लिए दूर-दराज के अन्य कस्बों या शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। वर्तमान में स्थिति यह है कि खेल मैदान के नाम पर केवल खाली जमीन पड़ी है, जहां उचित रखरखाव और सुविधाओं का भारी अभाव है। स्थानीय युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो उन्हें बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल
इस देरी के लिए स्थानीय ग्रामीण पूरी तरह से प्रशासनिक सुस्ती और अधिकारियों की उदासीनता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब बड़े मंचों से गांवों के विकास के दावे किए जाते हैं, तो धरातल पर उन दावों की पोल खुल जाती है। खेल मैदान के निर्माण में हो रही इस अनपेक्षित देरी से न केवल खेल प्रेमियों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले के मीडिया में आने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग कितनी जल्दी नींद से जागते हैं और चूहड़ी वाला गांव के इस बहुप्रतीक्षित खेल मैदान के निर्माण कार्य को हरी झंडी दिखाते हैं।