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राजनीति

मानवता की मिसाल: दादरी विमान हादसे के बाद सबसे पहले आरएसएस ने पहुंचाई थी मुस्लिम यात्रियों को मदद, मोहन भागवत का बड़ा बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ा बयान देते हुए याद दिलाया है कि दादरी में जब मुस्लिमों से भरा एक विमान टकराया था, तो संकट की उस घड़ी में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला संगठन आरएसएस ही था।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 14:07
मानवता की मिसाल: दादरी विमान हादसे के बाद सबसे पहले आरएसएस ने पहुंचाई थी मुस्लिम यात्रियों को मदद, मोहन भागवत का बड़ा बयान
हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिए गए एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में खासी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने एक पुराने हादसे का जिक्र करते हुए देश के सामने संघ के सेवाभाव का एक अलग ही पहलू रखा है। भागवत के अनुसार, जब दादरी क्षेत्र में मुस्लिमों से भरा हुआ एक विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर टकरा गया था, तब किसी भी धार्मिक या वैचारिक भेदभाव को दरकिनार करते हुए संघ के स्वयंसेवक सबसे पहले राहत और बचाव कार्यों के लिए वहां पहुंचे थे।

आपदा के समय निस्वार्थ सेवा

इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए संघ प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन का मुख्य उद्देश्य हमेशा से मानवता की सेवा करना रहा है। जब भी देश या समाज पर कोई प्राकृतिक अथवा मानव-निर्मित आपदा आती है, तो स्वयंसेवक बिना यह देखे कि पीड़ित कौन है और किस समुदाय से ताल्लुक रखता है, सबसे पहले सहायता का हाथ बढ़ाने के लिए आगे आते हैं। दादरी की इस घटना में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम यात्री प्रभावित हुए थे और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए उनकी जान बचाने और उन्हें हर संभव चिकित्सीय व बुनियादी मदद मुहैया कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

सामाजिक सद्भाव और वर्तमान परिप्रेक्ष्य

मोहन भागवत के इस बयान को वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में अक्सर विभिन्न समुदायों के बीच दूरियां बढ़ाने की कोशिश करने वाली ताकतों के बीच इस तरह के उदाहरण यह साबित करते हैं कि संकट के समय इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, यह उन लोगों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो वैचारिक आधार पर संगठन के कार्यों को लेकर पूर्वाग्रह रखते हैं।

भविष्य के लिए प्रेरणा

इस प्रकार की पुरानी घटनाओं को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने का उद्देश्य नई पीढ़ी और समाज को यह सिखाना है कि आपदाएं किसी से पूछकर नहीं आतीं और उनसे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आने वाले दिनों में इस बयान के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर और अधिक चर्चा होने की उम्मीद है, क्योंकि यह देश के सबसे बड़े वैचारिक संगठन की कार्यशैली और उसके मूल सिद्धांतों को गहराई से रेखांकित करता है।
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