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राजनीति

वंदे मातरम पर फैसला: कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ दो पद

कर्नाटक में कांग्रेस नीत राज्य सरकार ने वंदे मातरम के गान को लेकर एक नया आधिकारिक निर्देश जारी किया है, जिसके तहत अब प्रदेशभर में होने वाले सरकारी आयोजनों में इस राष्ट्रीय गीत के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे।

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Ankit Yadav
11 सित 2026, 11:50
वंदे मातरम पर फैसला: कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ दो पद
कर्नाटक की राजनीति में हाल ही में एक नया और महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला सामने आया है, जहां राज्य सरकार ने आधिकारिक आयोजनों और कार्यक्रमों के दौरान गाए जाने वाले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर नए दिशा-निर्देश तय कर दिए हैं। इस ताजा फैसले के अनुसार, अब दक्षिण भारत के इस प्रमुख राज्य में जब भी कोई आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, तो उसमें 'वंदे मातरम' के केवल प्रथम दो पदों का ही गायन किया जाएगा। राज्य के विभिन्न प्रशासनिक विभागों और संबंधित कार्यालयों को इस नए आदेश के बारे में विधिवत सूचित कर दिया गया है ताकि इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।

कांग्रेस सरकार का नया निर्देश

इस संबंध में प्रशासनिक गलियारों से मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने यह कदम विभिन्न सरकारी समारोहों में एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया है। अक्सर यह देखा जाता था कि अलग-अलग जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों में गीत के अलग-अलग हिस्सों का गायन किया जाता था, जिससे प्रोटोकॉल में स्पष्टता का अभाव रहता था। इस नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद अब पूरे राज्य में एक समान व्यवस्था देखने को मिलेगी। प्रशासनिक अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन आने वाले सभी संस्थानों और आयोजनों में इस नए नियम का कड़ाई से पालन करवाएं।

सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस प्रकार के नीतिगत फैसलों का असर केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय भी बन जाता है। हालांकि इस आदेश के बाद विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ हलकों में इसे प्रशासनिक सुगमता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, वहीं अन्य राजनीतिक विश्लेषक इसे लेकर अपनी-अपनी भविष्य की रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं। राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह के सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक मुद्दों पर अक्सर तीखी बहस देखने को मिलती है, और यह नया आदेश भी उसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है।

आगे की स्थिति और प्रशासनिक तैयारी

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ज़मीनी स्तर पर इस आदेश का क्रियान्वयन किस प्रकार से होता है। स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सरकारी निकायों में होने वाले आगामी राष्ट्रीय पर्वों या आधिकारिक उत्सवों के दौरान इस नियम को पूरी तरह से लागू करने की तैयारी की जा रही है। जिला स्तर के अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न पैदा हो। कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार का यह कदम राज्य के प्रशासनिक और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है, जिसपर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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