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राजनीति

वित्तीय कुप्रबंधन: सिरमौर में सांसद सुरेश कश्यप का प्रदेश सरकार पर तीखा हमला, चार साल में 51 हजार करोड़ का कर्ज बढ़ने का दावा

सिरमौर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सांसद सुरेश कश्यप ने वर्तमान प्रदेश सरकार पर कड़े प्रहार किए और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वर्षों के कार्यकाल में सरकार ने भारी कर्ज लिया है।

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Ankit Yadav
07 सित 2026, 14:24
वित्तीय कुप्रबंधन: सिरमौर में सांसद सुरेश कश्यप का प्रदेश सरकार पर तीखा हमला, चार साल में 51 हजार करोड़ का कर्ज बढ़ने का दावा
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से आर्थिक प्रबंधन और वित्तीय हालात को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर काफी तेज हो गया है। सिरमौर जिले में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुरेश कश्यप ने प्रदेश की सत्ता पर काबिज सरकार पर खुलकर निशाना साधा। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में सुगबुगाहट काफी बढ़ गई है और विपक्षी दलों की ओर से लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सांसद का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य के विकास कार्यों और बजट को लेकर विभिन्न मंचों पर बहस छिड़ी हुई है।

ऋण के आंकड़े और गंभीर आरोप

अपने संबोधन के दौरान सांसद सुरेश कश्यप ने वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासनकाल के महज चार वर्षों के अंतराल में ही प्रदेश पर वित्तीय बोझ बेतहाशा बढ़ गया है। उनके अनुसार इस अल्प अवधि के दौरान राज्य का कर्ज लगभग 51 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है। सांसद ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी धनराशि का उपयोग किन क्षेत्रों में किया जा रहा है और जनता के पैसों का इस तरह से अंधाधुंध कर्ज के दलदल में धकेलना किस प्रकार का वित्तीय अनुशासन है। उन्होंने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि शासन चलाने वाले लोग अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। विकास कार्यों के मोर्चे पर भी सांसद ने सरकार की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि भारी-भरकम कर्ज लेने के बावजूद धरातल पर जनता को कोई भी ठोस या बड़ा विकासात्मक प्रोजेक्ट देखने को नहीं मिल रहा है। आम नागरिकों का जीवन स्तर सुधारने के बजाय सरकार केवल लोकलुभावन घोषणाएं करने में व्यस्त है, जिसका खामियाजा अंततः प्रदेश की आम जनता को ही भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय कुप्रबंधन के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था दीर्घावधि के लिए संकट में पड़ सकती है, जिससे आने वाली पीढ़ियों पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इस प्रकार के आंकड़ों को आधार बनाकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है। सरकार की ओर से इन तमाम आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और वे इन वित्तीय आंकड़ों का किस प्रकार खंडन या स्पष्टीकरण करते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल, इस तीखे हमले के बाद प्रदेश का सियासी पारा काफी चढ़ गया है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का दौर लगातार जारी है।
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