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अनोखी चुनौती: बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप से पहले दिल्ली में बंदरों और कबूतरों से निपटने की तैयारी

राष्ट्रीय राजधानी में आगामी बैडमिंटन महाकुंभ के आयोजन से पहले प्रशासन के सामने एक अनूठी समस्या खड़ी हो गई है, जिससे निपटने के लिए कड़े प्रबंध किए जा रहे हैं।

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Kantap News डेस्क
16 अग 2026, 12:45
अनोखी चुनौती: बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप से पहले दिल्ली में बंदरों और कबूतरों से निपटने की तैयारी
राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के सफल आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और खेल अधिकारी युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं। हालांकि इस वैश्विक खेल आयोजन के रास्ते में एक अजीबोगरीब बाधा खड़ी हो गई है, जिससे आयोजकों की चिंता बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में बंदरों और कबूतरों का बढ़ता हस्तक्षेप खेल स्थलों और अभ्यास शिविरों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक खिलाडि़यों की सुरक्षा और मैचों के निर्बाध संचालन के लिए इन वन्य जीवों और पक्षियों के खतरे को दूर करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस दिशा में विशेष टीमों का गठन किया गया है जो खेल परिसरों के आसपास लगातार निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

सुरक्षा और प्रबंधन के कड़े निर्देश

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मेहमान खिलाडि़यों और विदेशी मेहमानों के स्वागत में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी जाएगी। स्टेडियम के आसपास विशेष जालों की व्यवस्था करने के साथ-साथ पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर बंदरों को सुरक्षित दूर भगाने के उपाय किए जा रहे हैं। पर्यावरणविदों और पशु कल्याण विशेषज्ञों की सलाह लेते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन जानवरों को कोई नुकसान न पहुंचे और वे खेल क्षेत्र से दूर रहें। इसके अलावा, खेल परिसरों के भीतर स्वच्छता बनाए रखने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि कबूतरों का जमावड़ा रोका जा सके। इन तमाम प्रशासनिक पहलों का मुख्य उद्देश्य यह है कि दुनिया भर से आने वाले शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी बिना किसी बाहरी बाधा के अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें और भारत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बेहतरीन मेजबानी का लोहा मनवा सके।

प्रतियोगिता को लेकर उत्साह और उम्मीदें

तमाम चुनौतियों के बावजूद खेल प्रेमियों में इस मेगा इवेंट को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। भारतीय शटलर भी इस घरेलू टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और लंबे समय से पसीना बहा रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक और प्रबंधकीय बाधाओं को समय रहते पार कर लेना भारत की आयोजन क्षमता को और अधिक मजबूत करता है। प्रतियोगिता के शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, और ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली किस प्रकार इन अनूठी चुनौतियों से पार पाते हुए एक ऐतिहासिक और सफल खेल महाकुंभ का आयोजन करती है।
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