जापान में मनजीत का ऐतिहासिक प्रदर्शन
जापान के आइची नागोया शहर में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ी मनजीत ने अपने खेल करियर का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने भाला फेंकने की स्पर्धा में 61.71 मीटर की दूरी तय करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया है। यह पदक मनजीत के अंतरराष्ट्रीय खेल सफर का पहला बड़ा कीर्तिमान है। मनजीत ने वर्ष 2022 से कोच नवल के मार्गदर्शन में अपने प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। कोच नवल, जो प्रसिद्ध जेवलिन थ्रोअर सुमित आंतिल के प्रशिक्षक भी हैं, के सानिध्य में मनजीत ने भाला फेंकने की बारीकियों को बहुत तेजी से आत्मसात किया। इस जीत के साथ ही उन्होंने अपने उन कठिन दिनों को पीछे छोड़ दिया है जब वे लगातार कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के बाद भी पदक से दूर रह गए थे। चीन में वर्ष 2023 के पैरा एशियाई खेलों में उन्होंने चौथा स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद जापान की विश्व चैंपियनशिप और वर्ष 2025 में दिल्ली में संपन्न हुई विश्व चैंपियनशिप में भी उनका स्थान चौथा ही रहा था। बार-बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी।
अभावों और संघर्ष भरी जीवन यात्रा
मनजीत के लिए इस पदक तक पहुंचने का रास्ता काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उनके पिता के देहांत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां बिमला देवी पर आ गई थी। बहुत ही आर्थिक तंगी के बीच मां ने घर के रोजमर्रा के खर्चों में कटौती की ताकि मनजीत के खेल से जुड़ी जरूरतों को पूरा किया जा सके। मनजीत ने बताया कि उनकी मां ही उनकी दुनिया हैं और यह पहला अंतरराष्ट्रीय मेडल उन्हीं को समर्पित है। स्वदेश लौटने के बाद वह अपनी मां को ही यह पदक पहनाएंगे। उनके बड़े भाई नीरज ने भी परिवार को संभालने के लिए मजदूरी करके मनजीत को पूरा सहयोग दिया है। मनजीत की सफलता के पीछे उनके परिवार का त्याग और उनका खुद का अटूट संकल्प है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से उनके परिवार ने विषम परिस्थितियों में उनका साथ दिया है, वह उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। मां की ममता और भाई के पसीने की बदौलत ही आज वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने में कामयाब हो सके हैं। यह पदक सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के वर्षों के संघर्ष का सुखद परिणाम है।
भविष्य की योजनाएं और करियर का मोड़
खेलों में आने से पहले मनजीत पुलिस विभाग में भर्ती होने के लिए लगातार तैयारी कर रहे थे। हालांकि, दृष्टिबाधा के कारण उन्हें हर बार मेडिकल जांच में असफलता का सामना करना पड़ा और उनका पुलिस में जाने का सपना टूट गया। उम्र सीमा पार होने के बाद, वर्ष 2019 में उन्होंने ग्रुप डी की सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दी। वह सोनीपत स्थित सिंचाई विभाग में बेलदार के पद पर नियुक्त हुए, लेकिन वहां भी उनकी आर्थिक हालत में कोई बड़ा सुधार नहीं हो सका। अब मनजीत का लक्ष्य पूरी तरह से खेल पर केंद्रित है। उन्होंने अपना अगला बड़ा सपना लास एंजल्स में आयोजित होने वाले पैरालिंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना तय किया है। इसके लिए वे जापान से स्वदेश लौटकर दिन-रात कड़ी मेहनत करने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य अपने थ्रो को 75 मीटर तक ले जाने का है। मनजीत को पूरा विश्वास है कि अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर वे अपने अगले लक्ष्यों को जरूर हासिल करेंगे। उनके जीवन का यह सफर साबित करता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि सही दिशा में प्रयास किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त की जा सकती है।