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बड़ी अनिश्चितता: झारखंड के उभरते खेल प्रतिभाओं को अपने द्रोण का कब तक करना होगा इंतजार
झारखंड के खेल जगत में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अपने मार्गदर्शक यानी द्रोण का और कितना इंतजार करना पड़ेगा।
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Ankit Yadav
29 अग 2026, 11:25
खेल की दुनिया में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक के बिना हर मुकाम अधूरा सा लगता है। कुछ ऐसा ही हाल इस समय झारखंड राज्य के उभरते हुए खिलाड़ियों का भी बना हुआ है। खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कब तक यहां के प्रतिभावान युवा अपने सपनों को एक नई उड़ान देने वाले उस मुख्य संरक्षक या प्रशिक्षणकर्ता का रास्ता देखते रहेंगे, जिसे उनकी सफलता का आधार माना जा रहा है। खेल प्रशासन और शासन प्रणाली की सुस्त चाल पर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं।
बुनियादी सुविधाओं और मार्गदर्शन की कमी
प्रशिक्षण और उचित देखरेख के अभाव में कई बार बेहतरीन प्रतिभाएं बीच में ही दम तोड़ने लगती हैं। झारखंड की माटी में जन्म लेने वाले खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है, चाहे वह तीरंदाजी हो, हॉकी हो या फिर क्रिकेट। लेकिन विडंबना यह है कि जब बात उच्च स्तर पर पेशेवर मार्गदर्शन की आती है, तो खिलाड़ियों को निराशा का सामना करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें तराशने की जो प्रक्रिया होनी चाहिए, उसमें लगातार देरी देखी जा रही है। यही कारण है कि आज हर कोई यह पूछने को मजबूर है कि राज्य के इन अर्जुन नुमा खिलाड़ियों को उनके द्रोण जैसे गुरु का सानिध्य आखिर कब तक नसीब होगा।
संबंधित विभागों और खेल संघों की ओर से अक्सर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वादों की लंबी फेहरिस्त पेश की जाती है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशिक्षण शिविरों की स्थापना और अनुभवी कोचों की नियुक्ति कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा असर युवा खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ रहा है, जो अपनी पूरी मेहनत और लगन के बावजूद केवल इसलिए पिछड़ जाते हैं क्योंकि उन्हें सही समय पर सही सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की असीम खेल ऊर्जा यूं ही व्यर्थ चली जाएगी। खेल संगठनों को आपसी खींचतान और औपचारिकता से ऊपर उठकर युवा प्रतिभाओं के भविष्य को प्राथमिकता देनी होगी। खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों में भी अब इस बात को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है कि उनकी सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार आगे नहीं आ रहा है।
आने वाले दिनों में यदि इन मसलों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो राज्य की खेल की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। खेल प्रेमियों की सिर्फ एक ही मांग है कि प्रशासन अपनी नींद से जागे और जल्द से जल्द उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि झारखंड के होनहार खिलाड़ी बिना किसी बाधा के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें और देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करने में कामयाब हो सकें।