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बड़ी विडंबना: कर्ज लेकर देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाला खिलाड़ी सब्जी बेचने को मजबूर, सीएम हेमंत सोरेन ने दिए सख्त निर्देश
झारखंड में खेल और खिलाड़ियों की स्थिति को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाला एक प्रतिभावान एथलीट आज भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और उसे चुकाने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य के खेल विभाग को तुरंत आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
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Ankit Yadav
02 सित 2026, 14:34
खेल जगत से एक अत्यंत दुखद और विचारणीय घटनाक्रम सामने आया है, जहां देश का मान बढ़ाने वाला एक राष्ट्रीय स्तर का एथलीट भीषण आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। अपनी खेल प्रतिभा के बल पर तिरंगे की शानत बढ़ाने और देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करने वाले इस खिलाड़ी ने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया था। समय पर वित्तीय सहायता या उचित सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण यह कर्ज अब एक विकराल समस्या बन चुका है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि उस कर्ज की पाई-पाई चुकाने के लिए इस खिलाड़ी को अपनी खेल पोशाक और अभ्यास छोड़कर सड़कों पर सब्जी बेचने जैसा कठिन कार्य करना पड़ रहा है। यह वाकया न केवल खेल प्रशासकों की उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि हमारे देश के उन खिलाड़ियों की वास्तविक दशा को भी दर्शाता है जो खेल के मैदान में तो चमक बिखेरते हैं, लेकिन असल जिंदगी में बुनियादी संघर्षों से जूझते रहते हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कड़ा दखल और खेल विभाग को निर्देश
जब मीडिया के माध्यम से यह मार्मिक कहानी राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंची, तो उन्होंने इस पर त्वरित और गंभीर रुख अपनाया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि देश के लिए पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों की ऐसी उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने राज्य के खेल विभाग को सक्रिय करते हुए निर्देशित किया है कि इस मामले की पूरी तहकीकात की जाए और संबंधित खिलाड़ी की हरसंभव वित्तीय मदद सुनिश्चित की जाए। प्रशासन को यह भी आदेश दिया गया है कि एथलीट के ऊपर चढ़े कर्ज के बोझ को कम करने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत तुरंत आर्थिक राहत पैकेज या अन्य सहायता पहुंचाई जाए, ताकि उसे इस अपमानजनक और संघर्षपूर्ण स्थिति से बाहर निकाला जा सके।
खिलाड़ियों के भविष्य और खेल व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने झारखंड सहित पूरे देश में खेल व्यवस्थाओं और एथलीटों के कल्याण को लेकर चल रही दावों की पोल खोल दी है। खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर के खिलाड़ियों को समय पर आर्थिक सुरक्षा और उचित स्पॉन्सरशिप नहीं मिलेगी, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी। एक तरफ जहां सरकारें बड़े-बड़े खेल आयोजनों और विज्ञापनों में करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के लिए मेडल लाने वाले असली नायक कर्ज चुकाने के लिए सब्जी बेचने जैसी मजबूरियों से दो-चार हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर खेल निकायों और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों के बाद खेल विभाग कितनी जल्दी और किस प्रभावी ढंग से इस खिलाड़ी की सुध लेता है। खेल जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि केवल तात्कालिक मदद देने के बजाए सरकार को एक ऐसा पुख्ता और स्थायी तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे किसी भी खिलाड़ी को अपनी आजीविका या कर्ज के लिए इस तरह की जिल्लत का सामना न करना पड़े। राज्य के खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई होगी और खिलाड़ी को उसका खोया हुआ सम्मान तथा वित्तीय राहत दोनों मिल सकेंगी।