डिजिटल डेटाबेस में दर्ज होगी हर जानकारी खेल जगत में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की जा रही है जिसके अंतर्गत अब देश भर के खिलाड़ियों के साथ-साथ विभिन्न खेल संघों का भी संपूर्ण रिकॉर्ड ऑनलाइन रूप से संरक्षित किया जाएगा। पारंपरिक रूप से कागजों और फाइलों में सिमटी रहने वाली खेल प्रशासन की व्यवस्था को अब पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की योजना पर काम चल रहा है ताकि किसी भी प्रकार की धांधली या पारदर्शिता की कमी की गुंजाइश को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। इस नई ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पंजीकृत खिलाड़ी की व्यक्तिगत जानकारी से लेकर उनकी उपलब्धियों का पूरा ब्योरा डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध होगा। इसके साथ ही संबंधित खेल संघों की गतिविधियों वित्तीय लेन-देन प्रशासनिक बैठकों और चुनाव संबंधी तमाम जानकारियों को भी इस केंद्रीय डेटाबेस का हिस्सा बनाया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने से खेल विभाग के पास हर एक एथलीट और एसोसिएशन का वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध रहेगा जिससे खेल प्रबंधन से जुड़ी तमाम प्रक्रियाओं को बेहद सुचारू और पारदर्शी तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी और किसी भी स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी।
खेल प्रशासन में सुधार की सख्त आवश्यकता भारतीय खेल परिदृश्य में लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने और खेल संघों के कामकाज में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए एक मजबूत तकनीकी ढांचे की बेहद आवश्यकता है। अक्सर खेल संघों के संचालन और खिलाड़ियों के चयन को लेकर विभिन्न प्रकार के सवाल उठते रहे हैं जिनका मुख्य कारण सूचनाओं का अभाव और रिकॉर्ड का मैनुअल होना माना जाता रहा है। इस तरह की कमियों को दूर करने और प्रशासनिक तंत्र को आधुनिक युग के अनुरूप ढालने के लिए डिजिटल डेटाबेस तैयार करने का यह निर्णय बेहद प्रासंगिक साबित हो सकता है। विभिन्न स्तरों पर खेल संगठनों की कार्यप्रणाली को जनता और सरकार के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के वास्ते यह तकनीक एक मील का पत्थर साबित हो सकती है क्योंकि इससे हर एक निर्णय और गतिविधि का डिजिटल प्रमाण सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा इस प्रकार की व्यवस्थाओं से खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों को भी यह जानने में आसानी होगी कि किस संघ द्वारा किस प्रकार की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और खिलाड़ियों को उनकी मेहनत के अनुरूप सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। आधुनिक तकनीक के इस दौर में खेल क्षेत्र को पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए इस तरह के सुधारात्मक कदम अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं ताकि खेल का स्तर और अधिक ऊंचाइयों को छू सके।
पारदर्शिता बढ़ने से खेल भविष्य पर असर आने वाले दिनों में जब यह ऑनलाइन डेटा प्रणाली पूरी तरह से धरातल पर उतरेगी तो इससे पूरे खेल तंत्र में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा ऐसी प्रबल संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। खिलाड़ियों को अब अपनी फेलोशिप छात्रवृत्ति या अन्य खेल सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि सब कुछ एक क्लिक पर डिजिटल रूप से उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त खेल संघों के पदाधिकारियों पर भी बेहतर प्रदर्शन करने और नियमों के दायरे में रहकर काम करने का नैतिक दबाव रहेगा क्योंकि उनका हर एक रिकॉर्ड सार्वजनिक और डिजिटल रूप से सुरक्षित होगा। इस नई व्यवस्था के कारण खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें समय पर उचित प्रशिक्षण प्रदान करना भी बहुत आसान हो जाएगा जिससे देश में खेल संस्कृति को एक नई दिशा और मजबूती मिलेगी। खेल प्रेमियों और विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस योजना को पूरी ईमानदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में भारतीय खेल संघों की छवि में सुधार होगा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।