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दिल दहला देने वाला दर्द: एशियन गेम्स से बाहर किए जाने पर फूट-फूटकर रोईं भारतीय खिलाड़ी
एशियन गेम्स के लिए चुनी जाने वाली भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद एक महिला खिलाड़ी का बेहद भावुक और झकझोर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए अपनी जान देने तक की बात कह दी है।
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Ankit Yadav
12 सित 2026, 13:10
खेल जगत से एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आ रहा है, जहां एक भारतीय महिला एथलीट ने टूर्नामेंट के दल से अपनी विदाई के बाद अत्यधिक मानसिक तनाव और निराशा का सामना किया है। सामने आई जानकारियों के अनुसार, जब इस खिलाड़ी को यह मालूम हुआ कि उनका चयन आगामी प्रतिष्ठित एशियन गेम्स के लिए नहीं किया गया है, तो वह खुद को रोक नहीं पाईं और मीडिया के सामने ही उनका सब्र टूट गया। उनका यह दर्दनाक रिएक्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने खेल प्रेमियों और आम जनता दोनों को ही गहरे सदमे में डाल दिया है। इस प्रकार की घटनाएं खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और चयन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं, क्योंकि वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अचानक बाहर होना किसी भी युवा एथलीट के लिए सहन करना बेहद कठिन हो जाता है।
मानसिक तनाव और चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
देशभर के विभिन्न खेल अकादमियों और लखनऊ समेत कई प्रमुख खेल केंद्रों में इस घटना के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि पेशेवर खेलों में खिलाड़ियों का जीवन अत्यधिक दबाव से भरा होता है, जहां जीत और हार के अलावा चयन की राजनीति भी उनके भविष्य का फैसला करती है। जब किसी एथलीट को बिना किसी स्पष्ट कारण या अचानक से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, तो उनके भीतर की मानसिक स्थिति बेहद नाजुक हो जाती है। लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी खेल प्रशिक्षण ले रहे युवा खिलाड़ी इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से बाहर होना उनके करियर पर कितना बड़ा आघात पहुंचा सकता है। ऐसे मौकों पर खेल संघों और मनोवैज्ञानिकों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है ताकि खिलाड़ियों को इस प्रकार के आघात से उबारा जा सके और उन्हें किसी भी गलत कदम उठाने से रोका जा सके।
माता-पिता से माफी और जीवन समाप्त करने की बात ने हर किसी को हैरान कर दिया है। वीडियो में जिस तरह से खिलाड़ी ने अपने परिजनों को संबोधित किया, उसने साफ कर दिया कि वह इस फैसले से कितनी ज्यादा टूट चुकी थीं। खेल जानकारों का कहना है कि एथलीट अपने देश के लिए खेलने के वास्ते अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं, और जब आखिरी समय में उन्हें निराशा हाथ लगती है, तो उनका मनोबल पूरी तरह बिखर जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ को भविष्य में अधिक पारदर्शी और संवेदनशील नीतियां बनाने की आवश्यकता है। खिलाड़ियों को केवल एक मशीन की तरह न देखकर उनके मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि कोई भी खिलाड़ी इस प्रकार के चरम निराशा के दौर से न गुजरे।
आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर खेल प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या इस खिलाड़ी की सुध ली जाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। खेल प्रेमियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस खिलाड़ी के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है और मांग की है कि उन्हें उचित सहायता और न्याय मिलना चाहिए। खेल के मैदान पर पसीना बहाने वाले इन सितारों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए, और चयन प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए ताकि किसी भी खिलाड़ी को इस तरह की मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।