जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या
फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब
‘CJP प्रोटेस्ट के लिए फंडिंग कहां से आती है?’ RSS के Indresh Kumar ने उठाए सवाल
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे
दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत
कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
डॉ. सुजाता के विचार: व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में खेलकूद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत
खेलकूद को बढ़ावा देने और उसके फायदों पर जोर देते हुए डॉ. सुजाता ने कहा है कि शारीरिक और मानसिक गतिविधियों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। उनके अनुसार खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समग्र व्यक्तित्व विकास की एक मजबूत नींव हैं।
A
Ankit Yadav
30 अग 2026, 15:26
आज के इस आधुनिक और तेज़ी से बदलते दौर में जीवनशैली जिस प्रकार की हो गई है, उसमें शारीरिक श्रम और बाहरी गतिविधियों का दायरा लगातार घटता जा रहा है। ऐसे समय में खेलकूद का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान डॉ. सुजाता ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि खेल मनुष्य के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है किताबी ज्ञान और औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ मैदान पर बिताया गया समय एक व्यक्ति को भीतर से मजबूत और अनुशासित बनाता है।
खेलों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव
खेल के मैदान पर उतरने से न केवल मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शारीरिक स्टैमिना बढ़ता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब युवा या बच्चे किसी भी प्रकार के खेल में भाग लेते हैं, तो उनका ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार होता है। इसके अलावा, रोजाना खेलने से तनाव, चिंता और आधुनिक जीवन की अन्य मानसिक समस्याएं काफी हद तक दूर रहती हैं। खेल हमें यह सिखाते हैं कि कैसे दबाव की परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही निर्णय लिया जाए। अनुशासन, समय का पाबंद होना और लगातार अभ्यास करने की कला इंसान केवल खेल के मैदान से ही सीख सकता है।
एक खिलाड़ी जीवन में कभी हार न मानने का जज्बा रखता है। मैदान पर मिलने वाली हार और जीत दोनों ही इंसान को भीतर से परिपक्व बनाती हैं। हार से सीख लेकर अगली बार और बेहतर प्रदर्शन करने की ललक ही किसी भी व्यक्ति को सफल बनाती है। डॉ. सुजाता ने अपने संबोधन में इसी बात को रेखांकित किया कि किस प्रकार खेल के माध्यम से नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। टीम भावना के साथ काम करना, साथियों का समर्थन करना और सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करना ऐसे गुण हैं जो केवल खेल के जरिए ही सहजता से सीखे जा सकते हैं।
आज के समय में समाज और अभिभावकों को भी यह समझने की आवश्यकता है कि शिक्षा के साथ खेलकूद उतना ही जरूरी है। बहुत से लोग अभी भी ऐसा मानते हैं कि केवल पढ़ाई ही सब कुछ है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफल होने के लिए व्यावहारिक ज्ञान और शारीरिक-मानसिक फिटनेस का होना भी उतना ही आवश्यक है। जब तक बच्चे खेलकूद से दूर रहेंगे, तब तक उनके व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होना कठिन है। शिक्षण संस्थानों में भी खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और प्रतियोगिताओं का आयोजन करना समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।
भविष्य की ओर देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को खेलकूद के प्रति अधिक से अधिक प्रेरित करें। स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल के अवसरों को बढ़ाना होगा ताकि हर बच्चे की प्रतिभा को सही मंच मिल सके। डॉ. सुजाता के इस संदेश से यह प्रेरणा मिलती है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए, जिससे एक स्वस्थ, ऊर्जावान और सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सके।