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खेल

एशियाई खेल: जापान में जगह की किल्लत के कारण दल के आकार में करनी होगी कटौती

जापान में आगामी एशियाई खेलों के आयोजन के दौरान स्थान और आवास की भारी कमी के चलते भारतीय दल के आकार को छोटा करने की मजबूरी सामने आ रही है, जिससे संबंधित तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।

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Ankit Yadav
27 अग 2026, 14:13
एशियाई खेल: जापान में जगह की किल्लत के कारण दल के आकार में करनी होगी कटौती
आगामी एशियाई खेलों को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती सामने आ रही है, जिसके तहत विभिन्न देशों के एथलीटों और अधिकारियों के दल में आवश्यक रूप से कटौती करनी पड़ेगी। इस महाकुंभ के आयोजन स्थल यानी जापान में आधारभूत संरचना और आवासीय व्यवस्थाओं के लिहाज से जगह की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। मेजबान देश की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सीमित संसाधनों के कारण अनिश्चित रूप से विशाल प्रतिनिधिमंडलों को समायोजित करना संभव नहीं होगा, जिसके चलते सभी भाग लेने वाले देशों को अपने खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की संख्या सीमित करने के निर्देश मिल सकते हैं।

प्रवेश और पंजीकरण पर असर

एशियाड में भाग लेने वाले विभिन्न देशों से अब तक भेजी गई प्रविष्टियों की संख्या काफी अधिक हो चुकी है, जिससे आयोजकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। खेल मंत्रालय और विभिन्न खेल महासंघ इस बात को लेकर माथापच्ची कर रहे हैं कि किन खिलाड़ियों और स्पर्धाओं को प्राथमिकता दी जाए ताकि पदक की संभावनाओं पर न्यूनतम असर पड़े। बड़ी संख्या में एंट्री आने के बाद यह साफ हो चुका है कि यदि दल का आकार नहीं घटाया गया, तो मेजबानी संभालना और खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं देना बेहद कठिन हो जाएगा। हर एक खेल अनुशासन के लिए कोटे निर्धारित करने की प्रक्रिया पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। भारतीय ओलंपिक संघ और अन्य संबंधित खेल निकाय इस स्थिति से निपटने के लिए एक संतुलित रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। प्राथमिकता उन एथलीटों को दी जाएगी जिनका अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है और जिनके पास पोडियम फिनिश करने का मजबूत मौका है। हालांकि, इस तरह की कटौती से कई युवा और उभरते खिलाड़ियों के सपनों को झटका लग सकता है जो लंबे समय से इस प्रतिष्ठित मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने की तैयारी कर रहे थे। विभिन्न खेल संघों के अधिकारी इस बात से भी चिंतित हैं कि अचानक होने वाले इन बदलावों से एथलीटों के मानसिक मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अंतिम रूप से दल का ढांचा किस प्रकार तैयार किया जाता है और कितने लोगों की सूची को हरी झंडी मिलती है। खेल प्रेमियों और जानकारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत अपने सर्वश्रेष्ठ दल को भेजने में कामयाब हो पाता है या फिर कड़े नियमों के आगे अपनी सूची को छोटा करने के लिए विवश होना पड़ता है।
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