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खेल नीति-2026: राजस्थान में खिलाड़ियों और संघों से सुझाव लेकर खेल निदेशालय बनाने पर हो रही है गंभीर चर्चा
राजस्थान में खेल और खिलाड़ियों के भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राजस्थान खेल नीति-2026 को लेकर मैराथन विचार-विमर्श का दौर शुरू हो चुका है, जिसमें विभिन्न खेल संघों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से अहम सुझाव मांगे गए हैं।
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Ankit Yadav
16 सित 2026, 14:57
राजस्थान सरकार ने राज्य में खेलों के स्तर को ऊंचा उठाने और खेल प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। नई खेल नीति-2026 को अंतिम रूप देने से पहले राज्य भर के प्रमुख खिलाड़ियों, खेल विशेषज्ञों और विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारना और उन्हें विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है। बैठकों के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो रही है, ताकि आने वाले समय में प्रदेश का कोई भी प्रतिभावान खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे।
स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और प्रशासनिक सुधार
विचार-विमर्श के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा खेल प्रबंधन यानी स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को बेहतर बनाने का रहा है। वर्तमान व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट लाने और खेल से जुड़ी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित 'खेल निदेशालय' के गठन पर बेहद गंभीर चर्चा चल रही है। अधिकारियों और खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि एक स्वतंत्र खेल निदेशालय अस्तित्व में आता है, तो इससे बजट आवंटन, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खिलाड़ियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का संचालन बहुत ही पारदर्शिता और तेजी के साथ किया जा सकेगा। इससे खेल संघों के साथ समन्वय स्थापित करने में भी आसानी होगी।
विभिन्न मंचों से सामने आ रहे सुझावों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि खेल अकादमियों का आधुनिकीकरण किया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को समय पर मंच मिले। खिलाड़ियों ने अपनी ट्रेनिंग, डाइट, और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं को नीति निर्माताओं के सामने रखा है। इन सभी सुझावों को संकलित करके राजस्थान खेल नीति-2026 का अंतिम मसौदा तैयार किया जा रहा है, जो आधुनिक समय की खेल जरूरतों के बिलकुल अनुकूल होगा।
खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश को खेल के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए यह नीति मील का पत्थर साबित होगी। इसमें न केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों और नकद पुरस्कारों के प्रावधानों को सरल बनाया जाएगा, बल्कि खेल के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा। संघों के प्रतिनिधियों ने भी सरकार की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि नए निदेशालय के बन जाने से प्रशासनिक अड़चनें पूरी तरह दूर हो जाएंगी।
आगामी दिनों में इस नीति के औपचारिक ऐलान से पहले कुछ और दौर की बैठकें आयोजित की जा सकती हैं, जिसमें सभी अंतिम प्रस्तावों को जोड़ा जाएगा। खेल जगत की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस नई नीति और प्रस्तावित निदेशालय के जरिए क्या कुछ सौगातें लेकर आती है, जिससे प्रदेश के युवाओं का भविष्य और अधिक सुरक्षित और उज्ज्वल हो सके।