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खेल प्रतिभाओं की तलाश: राजस्थान में 8 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अलग निदेशालय का प्रस्ताव

राजस्थान सरकार ने खेल जगत को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवा प्रतिभाओं को तराशने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत आठ से 14 साल की आयु वर्ग के बच्चों की पहचान करने और उनके लिए एक अलग खेल निदेशालय स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

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Ankit Yadav
16 सित 2026, 15:48
खेल प्रतिभाओं की तलाश: राजस्थान में 8 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अलग निदेशालय का प्रस्ताव
देश और प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने तथा भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने के उद्देश्य से राजस्थान में एक बेहद अहम पहल शुरू की गई है। सरकार द्वारा लाए गए नए प्रस्ताव के अनुसार, अब राज्य भर में विशेष अभियान चलाकर आठ से चौदह वर्ष के बच्चों की खेल प्रतिभाओं को तलाशा जाएगा। इस आयु वर्ग को खेल के लिहाज से सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चों की शारीरिक और मानसिक क्षमता को सही दिशा देकर विश्व स्तर का एथलीट या खिलाड़ी गढ़ा जा सकता है।

निदेशालय गठन से मिलेगी खेलों को गति

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके संचालन के लिए एक बिल्कुल अलग खेल निदेशालय बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। अभी तक खेल गतिविधियों और प्रतिभा खोज अभियानों का जिम्मा अन्य प्रशासनिक ढांचों के साथ संयुक्त रूप से देखा जाता रहा है, जिससे कई बार जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में विलंब होता है। एक स्वतंत्र निदेशालय के अस्तित्व में आने से प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी और बजट का आवंटन तथा उपयोग सीधे तौर पर खेल विकास के कार्यों में किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने का उचित अवसर प्राप्त होगा। राज्य के खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रस्ताव को धरातल पर पूरी मुस्तैदी से उतारा जाता है, तो यह राजस्थान के खेल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आमतौर पर देखा गया है कि दूर-दराज के इलाकों में कई ऐसी प्रतिभाएं होती हैं जो संसाधनों के अभाव में अपनी कला का प्रदर्शन नहीं कर पाती हैं। इस नई व्यवस्था के तहत स्कूल स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक विशेष शिविर लगाए जाने की उम्मीद है, जहां विशेषज्ञों की देखरेख में बच्चों के कौशल का परीक्षण किया जाएगा।

विशेषज्ञों की देखरेख में होगा प्रतिभाओं का चयन

चयनित किए जाने वाले बच्चों को केवल पहचान कर छोड़ नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें आगे की उच्च स्तरीय ट्रेनिंग, खेल उपकरण और पोषण संबंधी सहायता प्रदान करने की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। अलग निदेशालय के गठन से खेल अकादमियों के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी तेजी आने की पूरी संभावना है। सरकार का यह कदम न केवल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे ओलंपिक और एशियाई खेलों के लिए भी एक मजबूत खिलाड़ी बेस तैयार करने में मददगार साबित होगा। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसके क्रियान्वयन की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है, जिस पर पूरे प्रदेश के खेल जगत की निगाहें टिकी हुई हैं।
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