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कुश्ती में नाम रोशन: गोरखपुर की 17 वर्षीय अंशिका ने हांगकांग में जीता स्वर्ण पदक

गोरखपुर की रहने वाली 17 वर्षीय पहलवान अंशिका यादव ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। वे इस समय बंगलुरु में जेएसडब्ल्यू की स्पॉन्सरशिप के तहत अपना प्रशिक्षण पूरा कर रही हैं।

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Ankit Yadav
08 अक्ट 2026, 13:37
कुश्ती में नाम रोशन: गोरखपुर की 17 वर्षीय अंशिका ने हांगकांग में जीता स्वर्ण पदक

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की शानदार जीत

गोरखपुर के चौरी चौरा स्थित जमौली बाजार गांव की रहने वाली 17 वर्षीय अंशिका यादव ने हाल ही में हांगकांग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया है। अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। इस शानदार उपलब्धि के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा सम्मानित भी किया गया है। अंशिका के पिता मुरलीधर यादव रेलवे में कार्यरत हैं और उनकी माता मालती देवी एक गृहणी हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी अंशिका की खेल के प्रति रुचि बचपन से ही काफी गहरी थी। वर्तमान में वह जेएसडब्ल्यू के माध्यम से बंगलुरु में रहकर अपनी कुश्ती की तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्होंने आठ बार नेशनल स्तर पर और एक बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

संघर्ष और अखाड़े से सफलता तक का सफर

अंशिका के कुश्ती के सफर की शुरुआत तब हुई जब वह पांचवीं कक्षा में स्कूल स्तर पर आयोजित एक कबड्डी प्रतियोगिता में भाग ले रही थीं। उस दौरान हुए दंगल में उन्होंने असाधारण प्रदर्शन किया, जिसे देखकर शिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। हालांकि, शुरुआत में उनके पिता एक लड़की के कुश्ती लड़ने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन बाद में शिक्षकों के समझाने पर उन्होंने अंशिका को घर से तीन किलोमीटर दूर एक अखाड़े में भेजा। वहां बेटी के प्रदर्शन को देखने के बाद पिता ने उन्हें पूरा समर्थन देने का फैसला किया। बाद में उन्हें स्पोर्ट्स कॉलेज में दाखिला मिला, जहां उन्होंने अनुशासन के साथ कुश्ती का अभ्यास जारी रखा। सीमित संसाधनों के बीच भी अंशिका ने स्थानीय, राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। आज वह बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स की पढ़ाई के साथ ही अपना खेल करियर भी मजबूती से आगे बढ़ा रही हैं।

गांव की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

अपने गांव जमौली बाजार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने वाली अंशिका यादव अब अपने क्षेत्र की अन्य लड़कियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनके प्रयासों को देखकर गांव की 15 से 20 अन्य लड़कियां भी कुश्ती में रुचि दिखा रही हैं और खेल का प्रशिक्षण ले रही हैं। अंशिका का मानना है कि गांव की लड़कियों को कुश्ती सिखाने से उनकी न केवल पहचान बनेगी, बल्कि उन्हें आत्मरक्षा के गुर भी सीखने को मिलेंगे। वह खुद को एक आदर्श के रूप में स्थापित करना चाहती हैं ताकि अन्य लड़कियां भी बिना किसी संकोच के खेल में आगे बढ़ सकें। आने वाली 23 अक्टूबर को गोरखपुर में आयोजित होने वाली सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में अंशिका पुनः अपनी प्रतिभा दिखाएंगी। वह भविष्य में देश के लिए और भी पदक जीतने की दिशा में निरंतर अभ्यास कर रही हैं।

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