लखनऊ के साई सेंटर में भारतीय पहलवानों का अभ्यास शिविर शुरू
लखनऊ शहर के खेल परिसर में भारतीय कुश्ती खिलाड़ियों के लिए विशेष तैयारी शिविर का आगाज हो चुका है। इस प्रशिक्षण शिविर में देश के शीर्ष फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन पहलवान पसीना बहा रहे हैं। भारतीय फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के मुख्य कोच विनोद कुमार की देखरेख में खिलाड़ी आगामी विश्व चैंपियनशिप के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। एशियाई खेलों के दौरान भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन काफी शानदार रहा था और उन्हें वहां बड़ी सफलता मिली थी। कोच विनोद कुमार का मानना है कि एशियाई मंच पर मिली उस कामयाबी का सकारात्मक असर विश्व प्रतियोगिता की तैयारियों पर भी साफ दिखाई देगा। खिलाड़ी अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए आगामी मुकाबलों के लिए अपनी तकनीक को और अधिक मजबूत करने में लगे हुए हैं। लखनऊ स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इस केंद्र में कुश्ती के दांव-पेंच और फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खेल प्रेमियों की निगाहें भी इस बात पर टिकी हैं कि हमारे ये पहलवान वैश्विक स्तर पर किस प्रकार का प्रदर्शन करके दिखाते हैं। सभी एथलीट सुबह और शाम के सत्र में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं ताकि मैट पर उतरने से पहले उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पूरी तरह से तैयार हो सके।
स्वर्ण पदक विजेता अमन सहरावत और सुजीत कलकल से विशेष उम्मीदें
भारतीय फ्रीस्टाइल टीम के मुख्य कोच विनोद कुमार ने आगामी विश्व चैंपियनशिप के लिए कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों से खासी उम्मीदें जताई हैं। उन्होंने विशेष रूप से स्वर्ण पदक विजेता अमन सहरावत और सुजीत कलकल का नाम लेते हुए उनसे बेहतरीन प्रदर्शन की अपेक्षा की है। इसके अलावा दीपक पूनिया को भी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पदक का एक बहुत मजबूत दावेदार माना जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती टीम के मुख्य कोच हरगोविंद सिंह ने भी अपनी टीम के खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन पर संतोष जताया है। ग्रीको-रोमन कोच हरगोविंद सिंह का कहना है कि इस वर्ग के पहलवानों ने भी एशियाई खेलों के दौरान काफी अच्छा खेल दिखाया था। उनका मुख्य लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना है और टीम किसी भी कीमत पर खाली हाथ वापस नहीं लौटना चाहती है। कोच हरगोविंद सिंह ने विशेष रूप से नितेश और सुनील कुमार से बेहतर और आक्रामक प्रदर्शन करने की उम्मीद जताई है। ये सभी नामचीन पहलवान मैट पर अपनी बेहतरीन पकड़ बनाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। कोचों का पूरा जोर खिलाड़ियों की स्टैमिना, गति और तकनीक को और अधिक निखारने पर है ताकि अंतरराष्ट्रीय अखाड़े में देश का नाम ऊंचा किया जा सके।
पिछले साल के पदक सूखे को खत्म करने के इरादे से मैट पर उतरेंगे खिलाड़ी
गत वर्ष क्रोएशिया के जाग्रेब शहर में आयोजित हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पुरुष टीम के हाथ पूरी तरह से खाली रहे थे। उस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय पुरुष टीम का कोई भी सदस्य देश के लिए एक भी पदक जीतने में सफल नहीं हो पाया था। उस निराशाजनक परिणाम को पीछे छोड़ते हुए इस बार भारतीय पहलवान नए जोश के साथ उतरेंगे। इस बार एशियाई खेलों में मिली ऐतिहासिक सफलता के दम पर भारतीय पहलवान हर हाल में पदक का सूखा खत्म करना चाहते हैं। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का एकमात्र उद्देश्य यही है कि वे इस बार विश्व मंच पर देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतकर आएं। विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना और खाली हाथ न लौटना इस बार पूरी भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में मौजूद है। इसी चुनौती से पार पाने के लिए लखनऊ के साई सेंटर में पसीना बहाया जा रहा है और हर एक दांव पर बारीक नजर रखी जा रही है। पिछले सत्र की नाकामियों से सबक लेकर खिलाड़ियों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव किए हैं। अब यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि क्या हमारे ये स्टार पहलवान अंतरराष्ट्रीय मैट पर अपनी पुरानी असफलताओं को पीछे छोड़कर नया इतिहास रचने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।