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खेल

लापरवाही की हद: एक करोड़ की मरम्मत के बाद भी स्टेडियम की बदहाली से खिलाड़ी खुद साफ करने को मजबूर

झारखंड में खेल बुनियादी ढांचे की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है, जहां एक करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी स्टेडियम की हालत बेहद खराब है और खिलाड़ियों को अपनी प्रैक्टिस से पहले खुद मैदान की साफ-सफाई करनी पड़ रही है।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 11:53
लापरवाही की हद: एक करोड़ की मरम्मत के बाद भी स्टेडियम की बदहाली से खिलाड़ी खुद साफ करने को मजबूर
देश और राज्य स्तर पर खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सरकारों द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। ताजा मामला एक ऐसे खेल परिसर से जुड़ा है जहां भारी भरकम बजट खर्च होने के बावजूद व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं देखा गया है। यहां तक कि लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों और रख-रखाव के दावों के बीच, खिलाड़ियों को खुद अपनी मेहनत से मैदान और आसपास के हिस्से को साफ करना पड़ रहा है, ताकि वे वहां अभ्यास कर सकें। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का एक बड़ा उदाहरण पेश करती है।

एक करोड़ के बजट पर उठ रहे गंभीर सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस खेल स्टेडियम के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की भारी राशि आवंटित की गई थी। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी खेलप्रेमियों और खिलाड़ियों को मैदान की बदतर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। स्टेडियम के भीतर और बाहर फैली गंदगी, टूटे हुए बुनियादी ढांचे और रखरखाव के अभाव ने अधिकारियों की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि बजट का बड़ा हिस्सा कागजों पर ही खर्च दिखा दिया गया है, जबकि धरातल पर खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हो पा रही हैं।

खिलाड़ियों का संघर्ष और प्रशासनिक उदासीनता

जब देश के युवा और उभरते हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए मैदान पर आते हैं, तो उन्हें खेल पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय खुद झाड़ू और सफाई के औजार उठाने पड़ रहे हैं। यह दृश्य किसी भी खेल प्रेमी को झकझोर देने के लिए काफी है। खिलाड़ियों का खुद ही मैदान की साफ-सफाई करना इस बात का सबूत है कि संबंधित विभाग और खेल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आया है, जिससे खेल जगत से जुड़े लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।

भविष्य की चिंता और सुधार की मांग

इस पूरी घटना के सामने आने के बाद अब स्थानीय स्तर पर खेल संगठनों और जागरूक नागरिकों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि एक करोड़ रुपये जैसी बड़ी राशि का कहां और कैसे उपयोग हुआ है, इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य के उभरते खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा और वे अपनी प्रतिभा को सही मंच पर प्रदर्शित करने से वंचित रह जाएंगे। खिलाड़ी और उनके अभिभावक अब उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही इस गंभीर मामले का संज्ञान लेगा और स्टेडियम की दशा सुधारेगा।
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