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प्रशासनिक लापरवाही: सहारनपुर में स्पोर्ट्स कॉलेज के रपटे के लिए नहीं ली गई सिंचाई विभाग की एनओसी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में खेलकूद सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण कार्य में एक बड़ा प्रशासनिक पेंच सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कॉलेज परिसर तक पहुंचने और सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए रपटे के निर्माण से पहले संबंधित सिंचाई विभाग से किसी प्रकार की अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी (NOC) प्राप्त नहीं की गई थी। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और विभागों के बीच आपसी तालमेल पर सवाल ख

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Ankit Yadav
25 अग 2026, 18:12
प्रशासनिक लापरवाही: सहारनपुर में स्पोर्ट्स कॉलेज के रपटे के लिए नहीं ली गई सिंचाई विभाग की एनओसी
सहारनपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से एक स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। खेल और युवाओं के विकास के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को विभिन्न खेलों में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य के दौरान नियमों की अनदेखी करने का मामला सामने आने के बाद यह परियोजना चर्चा का विषय बन गई है। कॉलेज के पास जलमार्ग या नहर के पास बनाए गए रपटे के निर्माण में विभागीय प्रक्रियाओं का पालन न किए जाने से अब प्रशासनिक अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बिना अनुमति निर्माण पर उठे सवाल

किसी भी सार्वजनिक या सरकारी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति और तकनीकी मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। विशेष रूप से जल संसाधनों, नहरों या सिंचाई प्रणालियों के आसपास किसी भी तरह का ढांचा तैयार करने से पहले सिंचाई विभाग की एनओसी होना बेहद जरूरी माना जाता है ताकि भविष्य में जल प्रवाह में कोई बाधा उत्पन्न न हो और बाढ़ जैसी आपदाओं से बचा जा सके। लेकिन सहारनपुर के इस स्पोर्ट्स कॉलेज के मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण एजेंसी या संबंधित जिम्मेदारों ने इस चरण को नजरअंदाज कर दिया। बिना उचित अनुमति के रपटा तैयार कर दिए जाने से अब विभागीय नियमों के उल्लंघन की बात सामने आ रही है, जिससे भविष्य में तकनीकी अड़चनें भी आ सकती हैं।

विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई की संभावना

जैसे ही यह मामला प्रकाश में आया है, संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि सिंचाई विभाग इस मामले में कड़ा रुख अपना सकता है क्योंकि बिना एनओसी के इस तरह का निर्माण नियमों के विपरीत है। हालांकि अभी तक किसी बड़े प्रशासनिक दंड या निर्माण गिराए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस पर औपचारिकताएं पूरी करने के लिए नोटिस जारी किए जाने की पूरी संभावना है। यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो यह मामला तूल पकड़ सकता है और कॉलेज के उद्घाटन या संचालन में भी देरी का कारण बन सकता है। स्थानीय स्तर पर खेल प्रेमियों और नागरिकों का कहना है कि विकास कार्य तेजी से होने चाहिए, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर काम करने से सरकारी धन का नुकसान और कानूनी पचड़े की स्थिति बनती है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग मिलकर इस त्रुटि को कैसे सुधारते हैं और क्या भविष्य के लिए ऐसे मामलों में कड़ी चेतावनी जारी की जाती है या नहीं।
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