अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में ऐतिहासिक सफलता और पदकों की कुल संख्या
भूटान की राजधानी थिम्पू में दस से बारह अक्टूबर तक थिम्पू ओपन एशियन कराटे चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में बाह की विशुन मार्शल आर्ट्स अकादमी के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। इन सभी खिलाड़ियों ने मिलकर कुल दस पदक अपने नाम किए जिनमें पांच स्वर्ण पदक और पांच रजत पदक शामिल हैं। इस बड़ी खेल प्रतियोगिता में भारत के अलावा भूटान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे कई देशों के खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ओलंपिक समिति की पूरी मंजूरी मिलने के बाद भूटान कराटे एसोसिएशन ने इस प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें हमारे खिलाड़ियों ने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न देशों के खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला लेकिन बाह के खिलाड़ियों ने अपने बेहतरीन कौशल के दम पर स्वर्ण और रजत पदक जीतकर साबित कर दिया कि वे किसी से पीछे नहीं हैं। इस शानदार उपलब्धि से स्थानीय स्तर पर खेल के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
स्वर्ण और रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के नाम और उनकी श्रेणियां
इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अकादमी के कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। स्वर्ण पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों में सुहानी तोमर जिनकी उम्र सोलह वर्ष और भार वर्ग बावन किलोग्राम है, शामिल हैं। उनके साथ ही बारह वर्ष के अंशुम कुमार जिनका भार वर्ग चौंतीस किलोग्राम है, ने भी स्वर्ण पदक जीता। तेरह वर्ष के कृष्णा जिनका भार वर्ग उन्नतीस किलोग्राम है, ने भी अपनी श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। दस वर्ष की उम्र वाले अंशु जिनका भार वर्ग उन्नतीस किलोग्राम है और दुर्गेश कुमार जिनका भार वर्ग सैंतालीस किलोग्राम है, ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं दूसरी ओर रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में दस वर्ष की याशी मिश्रा जिनका भार वर्ग उन्नतीस किलोग्राम है, ग्यारह वर्ष की भूमि बघेल जिनका भार वर्ग चौंतीस किलोग्राम है, शामिल हैं। चौदह वर्ष के अनुराग जिनका भार वर्ग पैंसठ किलोग्राम है, चौदह वर्ष के वीरेंद्र कुमार जिनका भार वर्ग छत्तीस किलोग्राम है, और चौदह वर्ष की आराध्या ओझा जिनका भार वर्ग छियालीस किलोग्राम है, ने भी रजत पदक जीते। इन सभी खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में बेहतरीन तकनीक और अनुशासन का परिचय देते हुए पदक तालिका में अपना नाम दर्ज कराया और अपने माता-पिता तथा अकादमी का गौरव बढ़ाया।
प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का असर तथा युवाओं में बढ़ता हुआ उत्साह
कोच विशुन मिश्रा के कड़े मार्गदर्शन और उचित प्रशिक्षण के कारण ही खिलाड़ियों को यह अभूतपूर्व कामयाबी हासिल हुई है। कोच के द्वारा सिखाए गए अनुशासन और तकनीक ने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार किया था। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली बड़ी सफलता के बाद से क्षेत्र के युवाओं में कराटे खेल के प्रति भारी उत्साह और उत्सुकता देखी जा रही है। अधिक से अधिक युवा अब मार्शल आर्ट्स सीखने के लिए आगे आ रहे हैं और इस खेल को अपने भविष्य के रूप में देखने लगे हैं। कोच विशुन मिश्रा का मानना है कि यदि खिलाड़ियों को समय पर सही मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिल जाएं तो वे विश्व स्तर पर देश का नाम और अधिक ऊंचा कर सकते हैं। इस प्रतियोगिता के सफल आयोजन और खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से खेल जगत में एक सकारात्मक संदेश गया है। आने वाले समय में इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि देश के अन्य हिस्सों के युवाओं को भी विभिन्न खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। अकादमी के सभी सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत किया है।