अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चार साल बाद वापसी
भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी मुकाबला बाइस नवंबर दो हजार बाईस को भारतीय टीम के लिए खेला था। इसके बाद से लगातार चार वर्षों तक उनका चयन किसी भी भारतीय टीम में नहीं हुआ था और चयन समिति की बैठकों में भी उनके नाम पर कोई चर्चा नहीं होती थी। हालांकि, उन्होंने अपना अभ्यास जारी रखा और कभी भी मीडिया के सामने कोई बयानबाजी नहीं की। अपनी गेंदबाजी को लगातार निखारने के बाद उन्होंने आखिरकार चयनकर्ताओं को अपने प्रदर्शन से प्रभावित कर लिया। छतीस वर्ष की आयु में उनकी यह वापसी हर किसी के लिए एक बड़ा आश्चर्य बन गई क्योंकि कई लोगों ने उनके संन्यास की उम्मीद तक लगा ली थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी श्रृंखला के लिए उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में फिर से मैदान पर उतरने का मौका मिला है और वह अपनी स्विंग गेंदबाजी के दम पर विरोधी बल्लेबाजों के लिए काफी घातक साबित हो सकते हैं।
आईपीएल और यूपी टी20 लीग में शानदार प्रदर्शन
आईपीएल दो हजार पच्चीस में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की तरफ से खेलते हुए भुवनेश्वर कुमार ने सत्र के दौरान कुल सत्रह विकेट हासिल किए थे। इस टूर्नामेंट के अंतिम ओवरों में उनकी बेहतरीन गेंदबाजी ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था और उन्होंने अपनी फ्रेंचाइजी को पहली बार चैंपियन बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद आईपीएल दो हजार छब्बीस का सीजन उनके लिए और भी अधिक शानदार साबित हुआ जिसमें उन्होंने सोलह मुकाबलों में सत्रह दशमलव आठ नौ की औसत से कुल अट्ठाइस विकेट अपने नाम किए। वह उस टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने और उनकी शानदार गेंदबाजी की बदौलत आरसीबी लगातार दूसरी बार विजेता बनने में सफल रही। इसके अलावा यूपी टी20 लीग दो हजार छब्बीस में भी उन्होंने अपनी गेंदबाजी का जलवा दिखाया और ग्यारह मुकाबलों में छह दशमलव एक एक की इकॉनमी से चौदह विकेट चटकाए। अपनी बेहतरीन कप्तानी के दम पर उन्होंने लखनऊ फॉल्कंस टीम को फाइनल मुकाबले तक भी पहुंचाया था।
कड़ी मेहनत और संघर्ष का मिला फल
लगातार दो आईपीएल सत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद से ही भुवनेश्वर कुमार को दोबारा भारतीय टीम में शामिल किए जाने की मांग लगातार उठाई जा रही थी। उनके इस दमदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं पर काफी दबाव बना दिया था जिसके चलते उन्हें नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रह गया था। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि उनकी यह सफलता इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यदि कोई खिलाड़ी कड़ी मेहनत और निरंतरता बनाए रखता है तो उसे सफलता जरूर मिलती है। पिछले चार वर्षों के दौरान जब कई नए तेज गेंदबाज टीम इंडिया में आए और भुवनेश्वर का नाम धीरे-धीरे पीछे छूटता गया, तब भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने मैदान पर अपने खेल के जरिए अपनी फिटनेस और फॉर्म को साबित करके दिखाया कि उम्र केवल एक संख्या मात्र है। अब छतीस साल के हो चुके इस अनुभवी गेंदबाज का यह चयन युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन गया है जो यह सिखाता है कि संघर्ष का रास्ता कभी खत्म नहीं होता।