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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यूरोपीय देशों के साथ मिलकर जलवायु अध्ययन के लिए भेजा नया उपग्रह

वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में भारत ने एक और मील का पत्थर छू लिया है। देश की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से एक अत्याधुनिक जलवायु निगरानी उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:21
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यूरोपीय देशों के साथ मिलकर जलवायु अध्ययन के लिए भेजा नया उपग्रह
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और यूरोपीय अंतरिक्ष सहयोग परिषद के संयुक्त प्रयासों के तहत आज सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय प्रक्षेपण केंद्र से एक विशेष पर्यावरण निगरानी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र और भूमध्यसागरीय बेसिन में तापमान परिवर्तन, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और कार्बन उत्सर्जन के पैटर्न का बारीक अध्ययन करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उपग्रह अंतरिक्ष से प्राप्त होने वाले उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा के माध्यम से मौसम की सटीक भविष्यवाणियां करने में मील का पत्थर साबित होगा। इस संयुक्त उपक्रम के तहत दोनों देशों के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने पिछले तीन वर्षों से बेंगलुरु और पेरिस स्थित अनुसंधान केंद्रों में मिलकर काम किया था, जो अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक कूटनीति का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है यह नया अंतरिक्ष यान

इस उपग्रह में विशेष प्रकार के थर्मल इन्फ्रारेड सेंसर और लेज़र अल्टीमीटर लगाए गए हैं, जो रात के अंधेरे में भी बादलों के पार से पृथ्वी की सतह की तस्वीरें लेने में पूरी तरह सक्षम हैं। इसकी मदद से कृषि वैज्ञानिकों को सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाने में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी। प्रक्षेपण के ठीक सत्रह मिनट बाद, उपग्रह अपने निर्धारित भू-समकालिक कक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया, जिसके बाद बेंगलुरु स्थित मुख्य नियंत्रण केंद्र ने इसके सभी सिग्नलों को सामान्य रूप से प्राप्त करना शुरू कर दिया। इस सफलता पर देश के प्रधानमंत्री और यूरोपीय संघ के प्रमुख वैज्ञानिकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बधाई संदेश साझा किए और भविष्य में भी ऐसे संयुक्त अंतरिक्ष अभियानों को जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती अंतरिक्ष कूटनीति

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय अभियानों से वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। किफायती और विश्वसनीय प्रक्षेपण सेवाओं के लिए जानी जाने वाली भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी अब दुनिया भर के विकसित देशों के लिए पसंदीदा साझेदार बनती जा रही है। आने वाले महीनों में इस उपग्रह से मिलने वाले आंकड़ों को दुनिया के तमाम शोध संस्थानों के साथ साझा किया जाएगा ताकि वैश्विक स्तर पर जलवायु नीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सके। इस बीच, अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के निदेशक ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि हमारे वैज्ञानिकों की अगली टीम अब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अगले चरण के अन्वेषण कार्यों की रूपरेखा तैयार करने में जुट गई है।
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