श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आज सुबह 10:30 बजे इसरो ने गगनयान-3 मिशन के लिए क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि यह सीधे तौर पर 2026 के अंत में होने वाले भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की सफलता से जुड़ा हुआ है। मिशन के दौरान पैराशूट डिप्लॉयमेंट और हाई-ऑल्टिट्यूड एबॉर्शन तकनीक का बारीकी से निरीक्षण किया गया, जिसमें सभी पैरामीटर्स उम्मीदों के अनुरूप रहे।
परीक्षण की तकनीकी विशेषताएं इस परीक्षण में इस्तेमाल किए गए रॉकेट में एक डमी क्रू मॉड्यूल लगाया गया था, जिसे अधिकतम ऊंचाई पर ले जाकर मुख्य रॉकेट से अलग कर दिया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक किसी भी आपातकालीन स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने में सक्षम है। इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने कहा कि डेटा विश्लेषण से स्पष्ट है कि सभी सिस्टम्स ने 99 प्रतिशत सटीकता के साथ काम किया है, जिससे अब मानव मिशन की राह आसान हो गई है।
भविष्य की तैयारी और चुनौतियां अगले कुछ महीनों में इसरो का ध्यान लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अंतरिक्ष यान के आंतरिक दबाव को नियंत्रित करने वाली प्रणालियों पर केंद्रित रहेगा। गगनयान-3 के लिए तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों का चयन अंतिम चरण में है, जिन्हें विशेष रूप से रूस और भारत में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2026 के अंत तक भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन सकता है जिसने अपने दम पर अंतरिक्ष में मानव भेजने की क्षमता हासिल की हो।