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अंतरिक्ष में नया कीर्तिमान: इसरो के चंद्रयान-4 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की पुष्टि की

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-4 को सफलता पूर्वक उतारा है।

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Kantap News डेस्क
06 अग 2026, 15:18
अंतरिक्ष में नया कीर्तिमान: इसरो के चंद्रयान-4 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की पुष्टि की

आज सुबह 6 बजकर 42 मिनट पर इसरो के वैज्ञानिकों ने जैसे ही चंद्रयान-4 के लैंडर 'विक्रम-द्वितीय' को चंद्रमा की सतह पर उतरते देखा, पूरे देश में जश्न का माहौल छा गया। यह मिशन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि इसके माध्यम से चंद्रमा की मिट्टी में मौजूद दुर्लभ खनिजों का पता लगाने की तैयारी की गई है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि पर सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी है और इसे विज्ञान के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया है। पिछले कई महीनों से चल रही इस कड़ी मेहनत का फल आज पूरे देश को गर्व करने का अवसर दे रहा है।

मिशन के तकनीकी पहलू मिशन की सफलता के पीछे अत्याधुनिक सेंसर और एआई-आधारित नेविगेशन सिस्टम का हाथ है जिसे बेंगलुरु स्थित इसरो लैब में विकसित किया गया था। चंद्रयान-4 ने उतरने के तुरंत बाद 15 उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें भेजी हैं जिनमें क्रेटर्स और सतह की बनावट स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह यान अगले 14 दिनों तक लगातार डेटा भेजेगा जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए आधार का काम करेगा। रोवर के पहियों ने सतह पर अशोक स्तंभ की छाप छोड़ दी है जो अंतरिक्ष में भारत की उपस्थिति का प्रतीक है।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया नासा और ईएसए के विशेषज्ञों ने भी इसरो की इस उपलब्धि को 'अभूतपूर्व' बताया है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय का मानना है कि भारत की यह तकनीक न केवल सस्ती है बल्कि बेहद सटीक भी है। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां अब भारत के साथ मिलकर चंद्रमा पर अनुसंधान करने के लिए साझेदारी की मांग कर रही हैं। यह मिशन आने वाले दशक में सौर मंडल के अन्य ग्रहों पर जाने के लिए भारत के लिए रास्ते खोलेगा। आगामी दिनों में इसरो के अध्यक्ष एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विस्तृत रिपोर्ट साझा करेंगे।

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